मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ लाए गए विधेयक का सोमवार को बचाव करते हुए कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें महिलाओं को प्रेम संबंधों के जाल में फंसाया गया, उनसे शादी की गई और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि धोखाधड़ी से होने वाले धर्मांतरण के खिलाफ लाए जा रहे विधेयक का उद्देश्य इन मुद्दों का समाधान करना और ऐसी प्रथाओं पर अंकुश लगाना है।
फडणवीस ने मंत्रालय (सचिवालय) में पत्रकारों से कहा कि विपक्षी दल वोट बैंक के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं, लेकिन एक बार जब वे विधेयक को ध्यान से पढ़ेंगे, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र ऐसा कानून लाने वाला पहला राज्य नहीं है और कई राज्यों ने पहले ही गैरकानूनी धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिए इसी तरह के कानून बनाए हैं। यदि यह कानून बन जाता है, तो महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए इसी तरह के कानून बनाए हैं।
राज्य सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026 पेश किया, जिसमें दबाव, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। इस विधेयक के अनुसार, विवाह के बहाने गैरकानूनी रूप से धर्म परिवर्तन कराने वालों को सात साल की कैद की सजा दी जाएगी और उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। विधेयक में नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति के संबंध में उल्लंघन होने पर सात वर्ष तक के कारावास और पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।









