लोकवाहिनी, संवाददाता:मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में लंबे समय से लंबित धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने एंटी-कन्वर्जन (धर्मांतरण विरोधी) विधेयक को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद अब जल्द ही इस संबंध में शासन निर्णय (GR) जारी किए जाने की तैयारी है।
भारतीय जनता पार्टी के विधायक और सरकार में मंत्री नितेश राणे ने विधानभवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए इस फैसले का जोरदार स्वागत किया और इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक दिन करार दिया। नितेश राणे ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि “हमारे देवेंद्र भाई (देवेंद्र फडणवीस) के महाराष्ट्र में अब हिंदुत्ववादी विचारधारा के कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों का संघर्ष रंग लाया है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नया कानून न केवल मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के कानूनों के समान है, बल्कि कुछ मायनों में उनसे भी अधिक सक्षम और कठोर बनाया गया है। इस कानून के लागू होने के बाद, महाराष्ट्र में किसी का भी जोर-जबरदस्ती या प्रलोभन देकर धर्मांतरण करना एक गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा और दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा।
नितेश राणे ने विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करते हुए बताया कि अक्सर क्रिश्चियन मिशनरियों और अन्य समूहों द्वारा आर्थिक मदद, स्वास्थ्य सेवाओं या शिक्षा की आड़ में सामूहिक धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं। अब इस कानून के जरिए ऐसी गतिविधियों पर नकेल कसी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून में ‘घर वापसी’ के लिए भी विशेष प्रावधान और मार्ग खुले रखे गए हैं, ताकि जो लोग स्वेच्छा से अपने मूल हिंदू धर्म में वापस आना चाहते हैं, उन्हें पूरी सरकारी मदद और सुरक्षा प्रदान की जा सके।









