मुंबई। महाराष्ट्र में जून से सितंबर के बीच हुई भारी बारिश और बाढ़ ने खासतौर पर मछुआरा समुदाय की आजीविका पर गहरा असर डाला है। नावों और जालों के नुकसान के कारण कई परिवारों का जीवनयापन संकट में पड़ गया। इसी चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को मछुआरों के लिए विशेष वित्तीय सहायता पैकेज का ऐलान किया है।
राज्य के मत्स्य विभाग द्वारा जारी सरकारी प्रस्ताव के मुताबिक, बारिश और बाढ़ से प्रभावित मछुआरों को उनके नुकसान के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त नावों के लिए 6,000 रुपये और पूरी तरह नष्ट नावों के लिए 15,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं, मछली पकड़ने के जालों के नुकसान पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त जाल के लिए 4,000 रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त जाल के लिए 3,000 रुपये दिए जाएंगे।
मछली भंडारण के नुकसान को भी इस राहत पैकेज में शामिल किया गया है। इसके तहत सरकार ने 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अपेक्षित उत्पादन के 50 प्रतिशत तक मुआवजा देने का निर्णय लिया है। इससे उन मछुआरों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनकी पकड़ और व्यवसाय दोनों प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं।
सरकार ने सुनिश्चित किया है कि लाभार्थियों तक सहायता राशि सीधे पहुँचे। इसके लिए राहत राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली के तहत सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाएगी। मंजूरी और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय समितियों का गठन किया गया है।
नुकसान का ऑन-ग्राउंड मूल्यांकन स्थानीय अधिकारियों द्वारा किया जाएगा, जिसमें तलाठी, सरपंच और मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रहेगी। मूल्यांकन रिपोर्ट मत्स्य सहायक आयुक्त के माध्यम से सरकार को भेजी जाएगी। वहीं, पूरी प्रक्रिया की निगरानी और समीक्षा की जिम्मेदारी मत्स्य आयुक्त को सौंपी गई है।
सरकार का कहना है कि यह राहत पैकेज मछुआरा समुदाय को फिर से अपनी आजीविका मजबूती से शुरू करने में मदद करेगा और प्राकृतिक आपदा के बाद उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।










