लोकवाहिनी संवाददातारामटेक | महाकवि कालिदास ने “आषाढस्य प्रथम दिवसे” इस अमर पंक्ति से जिस ‘मेघदूत’ काव्य की शुरुआत की थी, उसी ऐतिहासिक रामटेक (रामगिरी) पर्वत की गोद में अब आधुनिक कला, तकनीकी ज्ञान और फिल्म नगरी का संगम होने जा रहा है।
राज्य सरकार ने बजट में विशेष प्रावधान कर रामटेक में राज्य की तीसरी भव्य फिल्म सिटी स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे विदर्भ के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास को नई शक्ति मिलने जा रही है।
इस प्रकल्प के लिए राज्य के विशेष राज्यमंत्री व स्थानीय विधायक आशीष जायसवाल ने लगातार फॉलोअप किया, जिनके प्रयासों से रामटेक में फिल्म नगरी बनाने के निर्णय को गति मिली है। इस संदर्भ में कुछ दिन पहले राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने नवरगांव स्थित प्रस्तावित जगह का निरीक्षण किया था।
इस प्रकल्प के चलते केवल रामटेक ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विदर्भ को सांस्कृतिक और साहित्यिक केंद्र के रूप में नई पहचान मिलने जा रही है। फिल्म सिटी बनाने का मार्ग प्रशस्त होने से विदर्भ के सांस्कृतिक वैभव में एक महत्वपूर्ण स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। आषाढ़ के पहले दिन जब रामगिरी पर मेघ उतरते हैं, तब आज भी कालिदास के काव्य का स्मरण हो आता है। अब उसी साहित्यिक परंपरा को आधुनिकता का मोड़ देते हुए रामटेक की फिल्म सिटी विदर्भ के विकास का नया क्षितिज छूने जा रही है।









