शहर में आगामी चुनावों की सरगर्मियाँ लगातार तेज़ हो रही हैं और राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ जनता तक पहुँचने में जुटे हैं। इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवार मनीष मसराम ने अपने चुनावी अभियान में आदिवासी, एसटी और एससी बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों को प्रमुख केंद्र बनाया है।
मसराम ने कहा कि समाज के गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को समान शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा ही समाज में सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनके अनुसार, सरकारी योजनाओं और स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर बच्चों के लिए बेहतर स्कूल, पुस्तकालय और अध्ययन सामग्री सुनिश्चित की जाएगी।
उम्मीदवार मसराम ने अपील की कि समाज के सभी वर्ग विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्ग के लोग इस सामाजिक न्याय की लड़ाई में उनका साथ दें। उन्होंने कहा कि केवल वोट देने से ही नहीं बल्कि शिक्षा और अधिकारों की बात को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने से ही बदलाव संभव है।
मनीष मसराम ने यह भी जोड़ा कि उनका अभियान केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की लंबी अवधि की भलाई और उनके भविष्य को सुरक्षित करने पर केंद्रित है। उन्होंने जनता से वादा किया कि उनके प्रयासों का सीधा लाभ आदिवासी, एसटी और एससी समुदाय के बच्चों को मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा और अधिकारों के मुद्दे पर चुनावी फोकस करने से मसराम अपने समर्थकों के बीच सकारात्मक संदेश भेज रहे हैं और इस रणनीति से वंचित वर्ग के लोगों के बीच जागरूकता और समर्थन बढ़ाने में मदद मिलेगी। चुनावी माहौल में उनके इस कदम को सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।






