मुंबई | महाराष्ट्र पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 252 करोड़ रुपये के मेफेड्रोन (Mephedrone) जब्ती मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद सलीम मोहम्मद सोहेल शेख को दुबई से प्रत्यर्पित कर गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ़्तारी मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ मुंबई पुलिस की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
दुबई से शुरू होकर मुंबई में खत्म हुई तलाश
मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने बताया कि शेख को कुछ दिन पहले दुबई में स्थानीय एजेंसियों के सहयोग से हिरासत में लिया गया था। इंटरपोल की मदद से उसके खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे भारत लाया गया।
सूत्रों के अनुसार, शेख देशभर में अवैध मेफेड्रोन निर्माण इकाइयाँ स्थापित करने और नेटवर्क के ज़रिए इस ड्रग की सप्लाई चेन तैयार करने की कोशिश कर रहा था।
क्या है मेफेड्रोन और क्यों है खतरनाक?
मेफेड्रोन एक सिंथेटिक ड्रग है, जो कोकीन और एक्स्टेसी जैसी नशीली दवाओं की श्रेणी में आता है। इसे ‘मीओ मीओ’ या ‘ड्रोन’ के नाम से भी जाना जाता है। यह न केवल अत्यधिक नशे की लत लगाता है, बल्कि इसके सेवन से मानसिक असंतुलन और मृत्यु तक हो सकती है।
पहले भी दुबई से हो चुकीं गिरफ्तारियाँ
अधिकारियों ने बताया कि यह तीसरा आरोपी है जिसे यूएई से प्रत्यर्पित किया गया है। इससे पहले, कुख्यात तस्कर सलीम डोला के बेटे ताहिर सलीम डोला और उसके सहयोगी मुस्तफा मोहम्मद कुब्बावाला को भी मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
सांगली फैक्ट्री से खुला 252 करोड़ का रैकेट
इस साल की शुरुआत में, मुंबई पुलिस ने सांगली जिले में छापा मारकर 252 करोड़ रुपये की मेफेड्रोन और कच्चा माल जब्त किया था। जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क महाराष्ट्र से लेकर गुजरात, राजस्थान और दक्षिण भारत तक फैला हुआ था।
अब तक इस केस में कुल 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कई संदिग्धों पर नज़र रखी जा रही है।
पुलिस की सख्त चेतावनी
मुंबई पुलिस ने कहा है कि राज्य में ‘केमिकल ड्रग्स’ बनाने और सप्लाई करने वाले किसी भी नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह केवल ड्रग्स नहीं, बल्कि समाज की जड़ों को खोखला करने की साजिश है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हर शख्स तक पहुँचने की तैयारी जारी है।”
दुबई से प्रत्यर्पण के बाद शेख की गिरफ्तारी ने न सिर्फ पुलिस की अंतरराष्ट्रीय समन्वय क्षमता को दिखाया है, बल्कि महाराष्ट्र में फैले ड्रग नेटवर्क की गहराई को भी उजागर कर दिया है। यह केस अब भारत की एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों के लिए एक ‘हाई-वैल्यू ऑपरेशन मॉडल’ बन गया है।











