लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। नागपुर की 16 वर्षीय नेत्रहीन तैराक ईश्वरी पांडे दृढ़ संकल्प, साहस और सपनों से सीमाओं को पार करने का कारनामा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारत और श्रीलंका को जोड़ने वाली पालक समुद्र (Palk Strait) को तैरकर पार करने का उनका ऐतिहासिक प्रयास 6 अप्रैल को होगा। यदि वह सफल होती हैं, तो वह ऐसा कारनामा करने वाली विश्व की पहली नेत्रहीन तैराक बन जाएंगी। नागपुर की ईश्वरी पांडे समुद्र का सीना चीरकर नया कीर्तिमान बनाने के लिए तैयार हैं।
ईश्वरी की यात्रा श्रीलंका के तलाईमन्नार से सुबह 2 बजे शुरू होगी और दोपहर करीब 3 बजे भारत के धनुषकोडी में समाप्त होने की उम्मीद है। 38 किलोमीटर की इस यात्रा में कई बड़ी चुनौतियां आएंगी, जिनमें तेज समुद्री धाराएं, ऊंची लहरें, बदलता मौसम और समुद्री जीवन के लिए खतरा शामिल है। ईश्वरी ने कहा, “यह अभियान आसान नहीं है, लेकिन मेरा आत्मविश्वास और तैयारी मुझे सफलता दिलाएगी।” वह इस यात्रा के लिए लंबे समय से कड़ी ट्रेनिंग कर रही हैं, जिसके लिए बहुत अधिक शारीरिक और मानसिक शक्ति की आवश्यकता होगी।
इस मिशन के लिए अनुभवी तैराकों, प्रशिक्षकों और चिकित्सा विशेषज्ञों की एक मजबूत टीम ईश्वरी के साथ जाएगी। इस टीम में ईशांत पांडे, रविंद्र तरारे, भावी राजगीर, संदीप वैद्य, शंकर आवनकर, विलास काले और डॉ. नीरव पांडे शामिल हैं। डॉ. अभय राजगीर चिकित्सा दल का नेतृत्व करेंगे, जबकि राष्ट्रीय प्रशिक्षक विजयकुमार और जयकुमार के साथ अंतरराष्ट्रीय तैराक सुखदेव धव पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे।
उन्हें हर आधे घंटे में आवश्यक पोषण दिया जाएगा। समुद्री जीवों से बचाव के लिए उनके शरीर पर पेट्रोलियम जेली लगाई जाएगी। उनकी सुरक्षा के लिए मुख्य नाव, स्पीडबोट और चार कयाक हर समय उनके साथ रहेंगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। इस ऐतिहासिक मिशन के लिए भारत और श्रीलंका की सरकारों से आधिकारिक अनुमति प्राप्त हो चुकी है। नौसेना विभाग और विदेश मंत्रालय का भी सहयोग प्राप्त है।
कोच संजय बाटवे ने ईश्वरी की कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और लगन को असाधारण बताया और विश्वास व्यक्त किया कि उनके प्रयासों से कई दिव्यांग खिलाड़ियों को नई दिशा मिलेगी। नागरिकों, सामाजिक संगठनों, उद्योगपतियों और खेल प्रेमियों ने पहल करते हुए इस मिशन के लिए वित्तीय और नैतिक सहयोग प्रदान किया है।











