होली भजनों से भावुक और आनंदमय हुआ वातावरण
बुज़ुर्ग सम्मान की भावना को मजबूत करने की पहल
विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन में 28 फरवरी को “वृद्धाश्रम या सुखाश्रम” विषय पर एक सार्थक एवं विचारोत्तेजक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन नई युवा उड़ान की ओर से किया गया, जिसमें विभिन्न संस्थानों तथा अलग-अलग क्षेत्रों से आए बुज़ुर्गों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य बदलते सामाजिक परिवेश में वृद्धाश्रम की आवश्यकता, पारिवारिक संरचना में आ रहे परिवर्तन और समाज की मानसिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुली चर्चा करना था।
परिचर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए। बुज़ुर्गों ने वर्तमान समय की चुनौतियों पर प्रकाश डाला, वहीं युवाओं ने अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। सवाल-जवाब के सत्र ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया। यह आयोजन केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच संवाद का एक सशक्त माध्यम साबित हुआ।
नई युवा उड़ान की संयोजक शशि तिवारी एवं सह-संयोजक दीप्ति तिवारी के नेतृत्व में कनक शर्मा, लतिका मिश्रा, रुचि बोस, प्रियंका तिवारी, मीनू गुप्ता, श्वेता वर्मा, प्रीति दुबे, निरंजना गांधी और शिवानी सिंह ने अपने समर्पण से कार्यक्रम को सफल बनाया।
कार्यक्रम में किरण दुवे उमाराव एवं संतोष पटेल द्वारा प्रस्तुत होली के भजनों ने वातावरण को आनंदमय बना दिया। मधुर प्रस्तुतियों से बुज़ुर्गों के चेहरों पर झलकता संतोष सभी के लिए भावुक क्षण बन गया।
मुख्य अतिथि के रूप में शैलजा काले एवं राजेश पशीने की गरिमामयी उपस्थिति और उनके प्रेरणादायक विचारों ने सभी को प्रभावित किया। यह आयोजन समाज में बुज़ुर्गों के सम्मान, संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।








