लोकवाहिनी, संवाददाता:पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में शुक्रवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) 243 में से करीब 202 सीटों पर जीत हासिल कर प्रचंड बहुमत की सरकार बनाने को ओर अग्रसर है जबकि करीब 90 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। नतीजों से यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता और उनके चुनावी अभियान की धमक पर एक बार फिर जनता ने मुहर लगा दी। इस चुनाव में मोदी राजग का सबसे बड़ा चेहरा रहे और उन्होंने तेरह जनसभाएं कर इस चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और तीन वाम दलों के महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि सर्वेक्षणों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में तेजस्वी यादव सबसे पसंदीदा चेहरे के रूप में उभरे थे। विपक्षी गठबंधन 35 सीटों के आकड़े पर सिमट गई। वहीं विपक्ष के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव कई बार पिछड़ने के बाद अपनी सीट सिर्फ 14 हजार वोटों से जीत दर्ज कर सके। भाजपा ने 101 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और 90 से सीटों पर उसने जीत दर्ज की। भाजपा का यह प्रदर्शन उसे राजनीतिक रूप से और मजबूत करेगा और पिछले साल के लोकसभा चुनाव में मिले झटके की बहुत हद तक भरपाई करेगा। दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा के लगातार शानदार प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में बिहार विधानसभा चुनाव के यह नतीजे सामने आए हैं।
इस चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) को भी काफी फायदा मिलता दिख रहा है। साल 2020 के चुनाव में केवल 43 सीट जीतने वाली नीताश की पार्टी इस बार लगभग 19 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 84 सीटों पर अपना कब्ज़ा जमाया है। वहीं खुद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘हनुमान’ बताने वाले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 19 सीटों पर कामयाबी हासिल की। पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी का तमगा हासिल करने के बावजूद प्रमुख विपक्षी पार्टी रही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक दिख रहा है और वह केवल 25 सीटों पर जीत दर्ज की।
राजद ने इस चुनाव में 140 से भी अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा था। बिहार में सरकार बनाने के लिए कम से कम 122 सीटें जीतना ज़रूरी है। निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के बीच दो चरणों में हुए बिहार चुनावों में राजग की यह जीत और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले छह महीनों के भीतर ही पश्चिम बंगाल और असम में चुनाव होने वाले हैं। भाजपा सांसद और मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, राजग बिहार में भारी जीत हासिल की। रुझानों में जीत के आवश्यक आंकड़े को पार करने के कुछ ही देर बाद दोपहर में भाजपा और जदयू के कार्यालयों में जश्न की लहर दौड़ गई और कार्यकर्ताओं ने ढोल- नगाड़ों के साथ नृत्य करना, पटाखे फोड़ना, गुलाल लगाना और अपने- अपने नेताओं की प्रशंसा में नारेबाज़ी करना शुरू कर दिया।
जद (यू) के 75 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास के सामने पार्टी कार्यकर्ताओं ने ‘टाइगर अभी जिंदा है’ शीर्षक से लगे एक पोस्टर के सामने फोटो भी खिंचवाए। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने मज़ाकिया लहजे में कहा, बेशक नीतीश कुमार का क़द बाघ से भी ऊँचा है… और हमें विश्वास है कि ये रुझान परिणामों में परिवर्तित हो जाएंगे। भाजपा ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे करीब 21 प्रतिशत वोट मिले हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा क्रमश: पाँच और चार सीटों पर जीत दर्ज की है। दोनों दलों ने छह-छह सीटों पर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस, जिसे अक्सर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में एक ‘कमजोर कड़ी’ के रूप में देखा जाता है, 61 में से केवल 6 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। भाजपा के एक अन्य राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में विपक्षी पार्टी ने अपनी विरासत खोई।











