नए सीएम की रेस में 5 नाम सबसे आगे चल रहे
पटना। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रमुख नीतीश कुमार की राज्यसभा सदस्य बनने की इच्छा ने राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उस एकमात्र बड़े हिंदी भाषी राज्य में अपना “स्वयं का मुख्यमंत्री” बनाने की स्थिति में दिख रही है, जहाँ अब तक यह पद उसके पास नहीं रहा।
इस बात के संकेत तभी मिल गए थे जब चार महीने से भी कम समय पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसने 2020 के बाद दूसरी बार जदयू से बेहतर प्रदर्शन किया था। नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद अब बिहार में नया मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। सूत्रों ने दावा किया है कि नए सीएम की रेस में 5 नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
पहला नाम है सम्राट चौधरी का। दूसरा नाम है नित्यानंद राय का। तीसरा नाम है दिलीप जायसवाल का। चौथा नाम है विजय सिन्हा का। पाँचवाँ नाम दीघा से भाजपा विधायक संजीव चौरसिया का है।
बताया जा रहा है कि खुद नीतीश कुमार भी चाहते हैं कि उनके राज्यसभा जाने के बाद सम्राट चौधरी ही मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालें, ताकि एनडीए सरकार की स्थिरता बनी रहे और राजनीतिक संतुलन कायम रहे। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि जदयू के कई बड़े नेता भी इस फॉर्मूले के पक्ष में हैं। सूत्रों के अनुसार जदयू के सीनियर लीडर्स भी चाहते हैं कि अगर भाजपा कोटे से सीएम बनना है, तो सम्राट चौधरी को ही मुख्यमंत्री बनाया जाए।
पहली बार बन सकता है भाजपा का मुख्यमंत्री
बिहार में नई सरकार का फॉर्मूला क्या होगा, इस पर भी हर किसी की नज़र है। बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बन सकता है। इसके अलावा जदयू कोटे से 2 डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे। इसमें नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाम भी है। उन्हें विधान परिषद भेजा जाएगा। साथ ही, अब बिहार में जदयू की कमान भी निशांत ही संभाल सकते हैं।
शपथ ग्रहण समारोह भी लगभग भाजपा का कार्यक्रम ही प्रतीत हुआ था, क्योंकि नए मंत्रिपरिषद में पार्टी को बड़ा हिस्सा मिला और उसे सबसे अहम गृह विभाग भी मिला। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उनके कई मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के अलावा भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संवाददाताओं से कहा, “भाजपा ने बिहार में महाराष्ट्र जैसा किया है। यह पार्टी हमेशा दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के खिलाफ रही है। अब यह समाजवादी गढ़ में अपना एजेंडा लागू करने की कोशिश करेगी।” गौरतलब है कि नीतीश कुमार, राजद प्रमुख लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद की तरह, 1990 के दशक के मंडल आंदोलन से उभरी राजनीति के प्रतिनिधि रहे हैं, जिसने बिहार की राजनीति में सवर्ण वर्चस्व को समाप्त किया था।









