नयी दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी ने घोषणा की है कि वह विदेशों में यूरेनियम खदानों की पहचान और संभावित अधिग्रहण के लिए एक विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्त करेगी। यह कदम कंपनी की भविष्य में स्थापित होने वाली परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कच्चे माल की सुनिश्चितता को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
एनटीपीसी पहले ही यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के साथ औपचारिक समझौते पर काम कर रही है। कंपनी राजस्थान में भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के साथ 42,000 करोड़ रुपये की संयुक्त परियोजना (जेवी) पर कार्यरत है। इस परियोजना में एनपीसीआईएल की 51 प्रतिशत और एनटीपीसी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में बांसवाड़ा में माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (एमबीआरएपीपी) की आधारशिला रखी।
एनटीपीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने कहा कि कंपनी विभिन्न परमाणु प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और राज्य सरकारों के सहयोग से अपनी परियोजनाओं को स्थापित कर रही है। एक अधिकारी ने बताया कि यूरेनियम परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए तकनीकी और व्यावसायिक जांच-पड़ताल के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सलाहकार की भूमिका यूरेनियम खदानों के स्थान, भंडार की मात्रा, रसद लागत और अन्य व्यावसायिक पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान करना होगी। यह कदम एनटीपीसी के लिए रणनीतिक महत्व रखता है, क्योंकि कंपनी देश में नई परमाणु परियोजनाओं के लिए स्थायी और सुरक्षित कच्चा माल सुनिश्चित करना चाहती है।
एनटीपीसी की यह पहल भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और रणनीतिक सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से उठाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में संसाधनों की पहचान और अधिग्रहण से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती आएगी।









