11 ने ₹99.30 लाख लौटाए, फिर भी कार्रवाई नहीं, 2 पर FIR दर्ज
गोंदिया जिले के सालेकसा तालुका में धान बोनस योजना को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2024–25 में राज्य सरकार द्वारा किसानों को राहत देने के उद्देश्य से प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये धान बोनस घोषित किया गया था। लेकिन इस योजना का लाभ किसानों तक पहुंचने के बजाय कुछ धान खरीदी संस्थाओं ने इसका गलत तरीके से फायदा उठाया।
जांच में सामने आया है कि सालेकसा तालुका की कुल 13 धान खरीदी संस्थाओं ने नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से बोनस की रकम निकाली। प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद इनमें से 11 संस्थाओं ने करीब 99.30 लाख रुपये की राशि प्रशासन को वापस कर दी है। हालांकि हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी अनियमितता सामने आने के बावजूद इन 11 संस्थाओं के खिलाफ अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
वहीं, बोनस की 79.74 लाख रुपये की राशि वापस न करने वाली दो धान खरीदी संस्थाओं के खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन का कहना है कि इन दोनों संस्थाओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल रकम वापस करने से अपराध माफ हो जाता है? विशेषज्ञों और किसान संगठनों का कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन कर सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी की गई है, तो दोषियों पर समान रूप से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सिर्फ पैसे लौटाने से जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता।
किसानों का भी आरोप है कि जिन योजनाओं का उद्देश्य उन्हें आर्थिक संबल देना होता है, उन्हीं योजनाओं में भ्रष्टाचार से उनका भरोसा टूटता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में सभी दोषियों पर निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई करता है या फिर यह घोटाला भी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।









