नाम वापसी का कारण राजनीतिक, आर्थिक नहीं – चुनाव अधिकारी महेश बालदी
पनवेल महानगरपालिका चुनाव में प्रभाग क्रमांक 18 ‘क’ से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। इस प्रभाग में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार स्नेहा शेंडे ने अपना नामांकन वापस ले लिया है, जिसके चलते अपक्ष उम्मीदवार स्नेहल ढमाले पाटील बिनविरोध निर्वाचित हो गई हैं। यह घटनाक्रम पनवेल की स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्नेहल ढमाले पाटील भाजपा विधायक विक्रांत पाटील की बहन हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही स्पष्ट रूप से आमदारों और सांसदों के रिश्तेदारों को चुनावी मैदान में उतारने का विरोध जता चुके हैं। इसके बावजूद विधायक विक्रांत पाटील द्वारा अपनी बहन को चुनावी मैदान में उतारे जाने से भाजपा के भीतर ही असंतोष और नाराजगी खुलकर सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी और पारिवारिक राजनीति को बढ़ावा देने के आरोपों के चलते स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं में असहजता देखी गई। इसी राजनीतिक दबाव और आंतरिक समीकरणों के चलते भाजपा उम्मीदवार स्नेहा शेंडे ने नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया।
पनवेल महानगरपालिका चुनाव में भाजपा के कुल 6 उम्मीदवार बिनविरोध निर्वाचित हुए हैं। वहीं दूसरी ओर महाविकास आघाड़ी के कुछ उम्मीदवारों ने जीत की संभावना न होने के चलते अपने नामांकन वापस ले लिए। चुनाव अधिकारी महेश बालदी ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि नामांकन वापसी के पीछे राजनीतिक और परिस्थितिजन्य कारण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के आर्थिक प्रलोभन या लेन-देन की बात सामने नहीं आई है।
इस घटनाक्रम ने पनवेल मनपा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है, वहीं आने वाले दिनों में भाजपा के भीतर उठी नाराजगी पर पार्टी नेतृत्व की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।








