लोकवाहिनी, संवाददाता:नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उन्होंने मिडिल ईस्ट में बदलती स्थिति के मद्देनजर पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की समीक्षा की और वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों से चर्चा की। युद्ध के कारण भारत पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक और ऊर्जा प्रभावों की समीक्षा की गई। पीएम आवास पर आयोजित बैठक में 3.30 घंटे तक पेट्रोलियम, कच्चा तेल, गैस, बिजली और फर्टिलाइजर्स की स्थिति को लेकर चर्चा की गई। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक तनाव के बावजूद देश के आम नागरिकों को कोई परेशानी न हो, इसलिए सरकार अलर्ट मोड में आ गई है।
जानकारी के अनुसार इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में तेल, गैस, खाद समेत सभी जरूरी चीजों की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है और सरकार इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है। उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए वैश्विक घटनाक्रमों की निरंतर निगरानी करना सरकार का मुख्य केंद्र बिंदु है।
बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर, सिविल एविएशन मिनिस्टर राममोहन नायडू, रेल और आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव समेत अन्य सीनियर लीडर मौजूद रहे। बैठक में पूरा जोर देश में जरूरी संसाधनों की बिना रोक सप्लाई, लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन तय करने पर रहा, जिससे देश के लोगों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
22 मार्च को अमेरिका के टेक्सास से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर कार्गो शिप मंगलुरु पोर्ट पर पहुँचा। रूस से भी एक जहाज तेल लेकर भारत आया। पिछले 7 दिनों में करीब पांच जहाज गैस-कच्चा तेल लेकर समुद्र के रास्ते भारत पहुँच चुके हैं। 12 मार्च को पीएम मोदी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। यह राष्ट्रीय शक्ति की एक कठिन परीक्षा है और इससे निपटने के लिए शक्ति, धैर्य और जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।











