राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को 20 कलाकारों को ललित कला अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया और कहा कि कला केवल सौंदर्य की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज को अधिक संवेदनशील और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने का एक सशक्त माध्यम है।
पुरस्कार समारोह के साथ ही अकादमी में 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का समापन भी हुआ, जिसमें चित्रकला, मूर्तिकला, फोटोग्राफी और इंस्टालेशन जैसी विधाओं में देश भर से 283 कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं।
राष्ट्रपति ने कहा–
“भारतीय परंपरा में कला को आध्यात्मिक साधना का रूप माना गया है। हमारे समाज में कलाकारों को विशेष सम्मान दिया जाता है। प्रदर्शनी में दिखायी गई कलाकृतियों से यह स्पष्ट है कि भारतीय कला निरंतर विकसित हो रही है और नए आयाम प्रस्तुत कर रही है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार अपने विचारों, दृष्टि और रचनात्मकता के माध्यम से एक नए भारत की छवि प्रस्तुत कर रहे हैं।
सम्मानित कलाकारों में अभिषेक शर्मा, एस. सोनम ताशी, विजय एम. ढोरे, भास्कर जॉयती गोगोई, आशीष घोष, गिरिराज शर्मा, आनंद जयसवाल, केसीएस प्रसन्ना, कनु प्रिया, तापती भौमिक मजूमदार और वेणुगोपाल वीजी शामिल हैं। हर कलाकार को दो लाख रुपये, स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
यह पहली बार है जब ललित कला अकादमी ने कलाकृतियों की बिक्री के माध्यम से कलाकारों की आत्मनिर्भरता और भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया। राष्ट्रपति ने कहा,
“कलाकृतियों का उचित मूल्यांकन कलाकारों को प्रोत्साहित करेगा और उन लोगों को प्रेरित करेगा जो कला को पेशे के रूप में अपनाना चाहते हैं।”
संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल के अनुसार, प्रदर्शनी के दौरान 74 कलाकारों की कलाकृतियां कुल 1.35 करोड़ रुपये में बिकीं।
सांस्कृतिक मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा,
“यह प्रदर्शनी परंपरा और आधुनिकता के सामंजस्य को दर्शाती है। कला हमें न केवल जोड़ती है बल्कि विश्व स्तर पर हमारी विशिष्ट पहचान बनाने का अवसर भी देती है।”









