(रविकांत तिवारी) डिजिटल युग ने मानवता और संस्कृति पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव डाले हैं। इसने मानव व्यवहार, संचार के तरीकों और सांस्कृतिक मानदंडों को काफी हद तक प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप आमने-सामने की बातचीत कम हो गई है और अकेलेपन की भावना बढ़ गई है।
वहीं आज के डिजिटल युग में बच्चों ने इसे ही अपनी दुनिया बना लिया है। वे इससे बाहर ही नहीं निकलना चाहते। वे स्मार्टफोन, टैबलेट, ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया के साथ बड़े हो रहे हैं। इंटरनेट उन्हें सीखने, रचनात्मकता को बढ़ावा देने और दोस्तों से जुड़े रहने में मदद करता है। हालाँकि, इन फायदों के साथ-साथ गंभीर खतरे भी हैं।
साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शिकारियों का आतंक, गेमिंग की लत, हानिकारक सामग्री, पहचान की चोरी और स्क्रीन पर निर्भरता बढ़ती चिंता का विषय है। कई बच्चे अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा कैसे करें या ऑनलाइन खतरों को कैसे पहचानें, यह पूरी तरह से नहीं समझते हैं।
परिणामस्वरूप, माता-पिता, स्कूल और सरकारें नाबालिगों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हो रही हैं। साथ ही बच्चों की मैदान में खेलने की आदत भी छूट गई है और इन डिजिटल उपकरणों के कारण बच्चों को कई तरह की बीमारियाँ भी घेर रही हैं। साथ ही बच्चे मानसिक तनाव, मोटापा, स्मरण शक्ति की कमी और बेहद जिद्दीपन के शिकार होते जा रहे हैं, जिससे सहनशीलता पूरी तरह समाप्त
हो गई है। पहले के बच्चों को ‘गूगल’ कहा जाता था , लेकिन आज किसी बच्चे से कुछ पूछो, वह नहीं बता पाएगा और तो और वह सीधा सर्च इंजन गूगल से पूछेगा।
आज की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की अनियंत्रित पहुँच है। 16 वर्ष से कम आयु के बच्चे अक्सर अनुचित सामग्री, नकारात्मक साथियों के दबाव और अवास्तविक तुलनाओं के संपर्क में आते हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहाँ नाबालिगों को फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से निशाना बनाया गया या उन्हें निजी तस्वीरें और जानकारी साझा करने के लिए बहकाया गया।
इन बढ़ते जोखिमों के जवाब में भारत भर में सख्त डिजिटल नियमों पर चर्चा शुरू हो गई है। इसी क्रम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 6 मार्च को राज्य में मोबाइल इस्तेमाल के बुरे असर को कम करने के लिए एक बड़ा एलान किया। मुख्यमंत्री ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर बैन लगाने की बात कही है।
सीएम सिद्धारमैया ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के बजट में टेक्नोलॉजी से चलने वाली लर्निंग पहलों को रेगुलेटरी उपायों के साथ मिलाकर सुधारों का एलान किया है, ताकि बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा दी जा सके। सीएम सिद्धारमैया ने राज्य में 16 साल के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की बात कही है। राज्य में जब यह नियम लागू होगा, तब कर्नाटक बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।
सिद्धारमैया ने कहा, “बच्चों पर बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल के बुरे असर को रोकने के लिए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बंद कर दिया जाएगा। उधर दूसरे राज्यों में भी चर्चा जोरों पर है। आंध्र प्रदेश ने बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए प्रतिबंध लगाने या यहाँ तक कि 13 वर्ष के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।
अन्य राज्य भी सोशल प्लेटफॉर्म के शुरुआती उपयोग को सीमित करने और ऑनलाइन नुकसान को कम करने के लिए इसी तरह के उपायों पर विचार कर रहे हैं। हालाँकि ऐसे कदम लागू होने में समय लग सकता है, लेकिन ये समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं।
दुनिया के कई देशों में हो रहा है ऐसा
दुनिया के कई देश नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की तैयारी कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया पहला देश है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल दिसंबर में ही इस कानून को लागू कर दिया था। इसके बाद 47 लाख अकाउंट्स को डिलीट (या ब्लॉक) किया गया है।
यूरोपियन यूनियन के एक एक्सपर्ट ग्रुप ने इसी हफ्ते बच्चों के लिए ऐसे ही सोशल मीडिया बैन पर काम शुरू किया है। ब्रुसेल्स भी ऐसा करने की तैयारी कर रहा है। हालाँकि, उसकी नज़रें अभी ऑस्ट्रेलियाई बैन पर हैं, क्योंकि उसके खिलाफ पहले ही कई कानूनी चुनौतियाँ दायर की जा चुकी हैं।
फ्रांस, डेनमार्क, ग्रीस और स्पेन में भी कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की वकालत की जा रही है। भारत में भी नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की माँग लंबे समय से हो रही है।
ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने लगाया बैन
ऑस्ट्रेलिया के बाद इंडोनेशिया में भी 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया बैन लगाया जा रहा है। इंडोनेशियाई सरकार में डिजिटल मामलों की मंत्री मुत्या हफीद (Meutya Hafid) ने कहा कि उन्होंने आज एक सरकारी नियम पर साइन किए हैं, जिसका मतलब है कि 16 साल से कम उम्र के लोग अब यूट्यूब, टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स, एक्स (X), बिगो लाइव और रॉब्लॉक्स जैसे हाई-रिस्क डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकाउंट नहीं बना पाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस नियम को 28 मार्च से धीरे-धीरे लागू किया जाएगा। मंत्री मुत्या हफीद ने इस फैसले की वजह के बारे में बताते हुए कहा, “इसका आधार साफ है। हमारे बच्चों को लगातार असली खतरों का सामना करना पड़ रहा है। पार्नोग्राफी, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और नशे की लत पड़ रही है।”
उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों के भविष्य पर अपना हक वापस पाने के लिए ‘डिजिटल इमरजेंसी’ के बीच अच्छी कोशिश के तौर पर यह कदम उठा रही है। उन्होंने आगे कहा, “हमें पता है कि इस नियम को लागू करने से शुरू में कुछ परेशानी हो सकती है। बच्चे शिकायत कर सकते हैं और माता-पिता कंफ्यूज हो सकते हैं कि अपने बच्चों की शिकायतों का जवाब कैसे दें।”
लेखक : रविकांत तिवारी







