आस्था बनाम रासायनिक प्रक्रिया, वारकरियों की चेतावनी
पांचवें वज्रलेप पर सवाल, मंदिर समिति से पुनर्विचार की मांग
महाराष्ट्र के आराध्य दैवत भगवान विठ्ठल की मूर्ति पर प्रस्तावित वज्रलेप प्रक्रिया को लेकर पंढरपुर में विवाद खड़ा हो गया है। वारकरी संप्रदाय ने इस रासायनिक प्रक्रिया का कड़ा विरोध करते हुए मंदिर समिति से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, विठ्ठल मूर्ति पर यह पांचवीं बार वज्रलेप किया जाना प्रस्तावित है।
वारकरी संगठनों का कहना है कि बार-बार की जाने वाली वज्रलेप जैसी रासायनिक प्रक्रिया मूर्ति के मूल स्वरूप और दीर्घकालीन संरक्षण के लिए नुकसानदायक हो सकती है। उनका मानना है कि विठ्ठल मूर्ति केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है, इसलिए इसके संरक्षण में अत्यंत सावधानी बरती जानी चाहिए।
वारकरी पाईक संघ सहित सभी प्रमुख वारकरी संगठनों ने इस निर्णय का एकमत से विरोध किया है। पाईक संघ के प्रवक्ता सागर महाराज बेलापुरकर ने स्पष्ट किया कि मूर्ति पर किसी भी प्रकार की रासायनिक प्रक्रिया से पहले विशेषज्ञों की राय और वारकरी संप्रदाय की भावनाओं को ध्यान में लिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह विषय है और इसमें जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
इस घटनाक्रम के चलते पंढरपुर में वज्रलेप प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। अब सभी की नजरें मंदिर समिति और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे वारकरी संप्रदाय की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि समय रहते संवाद नहीं हुआ, तो यह मुद्दा और अधिक गहराने की संभावना जताई जा रही है।









