जयपुर। राजस्थान पुलिस ने राज्य की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के खिलाफ फर्जी और अपमानजनक खबरें प्रकाशित करने तथा उन्हें हटाने के लिए करोड़ों रुपये मांगने के आरोप में मध्य प्रदेश से दो पत्रकारों आनंद पांडे और हरीश दिवेकर को हिरासत में लिया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने समाचार पोर्टल ‘द सूत्र’ और उसके यूट्यूब चैनल पर कुमारी के खिलाफ कई निराधार खबरें प्रकाशित की थीं। शिकायत 28 सितंबर को जयपुर के करणी विहार पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई थी।
कौन और कैसे?
आरोपियों का दावा है कि वे पत्रकारिता के तहत रिपोर्टिंग कर रहे थे, लेकिन पुलिस की जांच में यह सामने आया कि उन्होंने खबरों को हटाने और भविष्य में प्रकाशित न करने के एवज में उपमुख्यमंत्री के परिचितों से पांच करोड़ रुपये की मांग की। पुलिस का कहना है कि मांग पूरी न होने पर आरोपियों ने “डिस्ट्रॉय दीया” अभियान चलाने की धमकी दी।
जांच में यह भी पता चला कि भ्रामक खबरें ‘द कैपिटल’ नामक अन्य वेब पोर्टल पर भी प्रकाशित की गई थीं। तकनीकी जांच और गवाहों के बयानों से पुष्टि हुई कि ये खबरें पूरी तरह से निराधार थीं।
पुलिस की कार्रवाई
जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ ने कहा कि जांच में आरोप सही पाए गए। दोनों आरोपियों को भोपाल से हिरासत में लेकर जयपुर लाया गया और उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस ने कहा कि आपराधिक साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है।
पुलिस ने यह भी बताया कि जांच के दौरान यह पाया गया कि पत्रकारों ने अपने पोर्टल और यूट्यूब चैनल के माध्यम से उपमुख्यमंत्री की छवि खराब करने और उनके खिलाफ डर फैलाने का प्रयास किया।
शिकायत का विवरण
शिकायतकर्ता नरेंद्र सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि आनंद पांडे और हरीश दिवेकर ने झूठी और अपमानजनक खबरें चलाकर उपमुख्यमंत्री के खिलाफ साजिश रची। आरोप है कि उन्होंने समाचारों को हटाने और भविष्य में प्रकाशित न करने के लिए कई करोड़ रुपये की मांग की।
पुलिस ने बताया कि दोनों पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई और तकनीकी जांच में पाया गया कि खबरें तथ्य-आधारित नहीं थीं। आरोपियों ने कथित तौर पर पैसे न देने पर उपमुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया और पोर्टल पर अभियान चलाने की धमकी दी।
‘द सूत्र’ का जवाब
पोर्टल के प्रवक्ता ने पुलिस कार्रवाई को “चौंकाने वाला और गैरकानूनी” बताया। उनका कहना था कि उन्होंने पिछले सात वर्षों में शासन, जवाबदेही और जनहित पर लगातार सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई स्वतंत्र पत्रकारिता को डराने और चुप कराने की कोशिश है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस अब दोनों पत्रकारों से पूछताछ कर रही है और इस आपराधिक साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
राजस्थान पुलिस का कहना है कि यह मामला पत्रकारिता के नाम पर चलाए जा रहे ब्लैकमेल रैकेट और फर्जी खबरों के खिलाफ एक चेतावनी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी और राज्य के राजनीतिक नेतृत्व और समाज की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।








