लोकवाहिनी संवाददाता,नासिक। मराठी भाषा विभाग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा उत्पन्न अवसरों और चुनौतियों का लाभ उठाते हुए मराठी साहित्य को वैश्विक स्तर पर ले जाने का कार्य करेगा। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नई पीढ़ी में मराठी भाषा के संचार कौशल विकसित करने के लिए एक ‘भाषा प्रयोगशाला’ स्थापित की जाएगी। वे KTHM कॉलेज के कैंपस में आयोजित चौथे विश्व मराठी सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री छगन भुजबल, जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, सम्मेलन के संयोजक और मराठी भाषा मंत्री डॉ. उदय सामंत, महापौर हिमगौरी अहेर-आडके, सांसद डॉ. शोभा बच्छाव, सांसद राजाभाऊ वाजे, संभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गदाम, भाषा विभाग की सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने कहा कि विश्व मराठी सम्मेलन के लिए अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, नॉर्वे सहित दुनिया के विभिन्न देशों से मराठी बंधुओं ने नासिक का दौरा किया है। विश्व भर के मराठी भाषी लोग मराठी भाषा और महाराष्ट्र के ‘ब्रांड एंबेसडर’ हैं। उनके माध्यम से महाराष्ट्र की संस्कृति और गौरव विश्व तक पहुँचता है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अगले वर्ष नासिक के त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले में विदेश से आए मराठी बंधुओं को आमंत्रित करते हुए यह बात कही।
देश का अधिकांश साहित्य मराठी भाषा में रचा जाता है। देश का सबसे समृद्ध रंगमंच मराठी भाषा में है। यहाँ नए नाटक मंचित होते हैं और उनके प्रशंसकों की भी बड़ी संख्या है। इस भूमि में साहित्य, नाटक और लोकगीतों के प्रति प्रेम है और मराठी भाषा ने इन्हें सुरक्षित रखा है। मराठी भाषा द्वारा निर्मित लोक परंपराओं ने हमारे जीवन को समृद्ध किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे कितनी भी चुनौतियां क्यों न आएँ, शास्त्रीय साहित्य को चुनौती नहीं दी जा सकती। भाषा पर गर्व करने के साथ-साथ इसे ज्ञान और व्यापार की भाषा बनाना भी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि मराठी विभाग इसके लिए अच्छे प्रयास कर रहा है। हमारे इतिहास में सबसे पहले अपनी मातृभाषा पर गर्व और भाषा की शुद्धता का पाठ पढ़ाया गया। जब विदेशी आक्रमणकारियों ने हम पर शासन किया, तब हमारे राज्य प्रशासन में फारसी और अरबी शब्दों का प्रयोग किया जाता था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने मानक भाषा का एक संग्रह तैयार किया। स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने आधुनिक महाराष्ट्र में भाषा के शुद्धिकरण का कार्य किया।








