नई दिल्ली। लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की रिहाई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 6 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।
यह याचिका उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा और अधिवक्ता सर्वम रितम खरे के माध्यम से दाखिल की है, जिसमें उन्होंने वांगचुक की गिरफ्तारी को ‘अवैध, मनमानी और असंवैधानिक’ बताया है।
क्या है मामला
लद्दाख में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत और 90 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद प्रशासन ने 26 सितंबर को सोनम वांगचुक को NSA की धारा 3(2) के तहत हिरासत में लिया था।
वांगचुक वर्तमान में राजस्थान के जोधपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं।
NSA के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के 12 महीनों तक हिरासत में रखा जा सकता है।
याचिका में क्या कहा गया है
गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि—
- वांगचुक की गिरफ्तारी पूरी तरह संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के उल्लंघन में की गई है।
- उन्हें बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट के तहत तत्काल न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए।
- हिरासत के बाद उन्हें बुनियादी सुविधाओं, दवाइयों और परिवार या वकील से मिलने के अधिकार से वंचित रखा गया है।
- हिरासत के कारण वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है, जबकि वे पहले से ही भूख हड़ताल के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे।
जोधपुर जेल में ‘दुर्व्यवहार’ और पत्नी की नजरबंदी के आरोप
याचिका में यह भी कहा गया है कि वांगचुक को अचानक जोधपुर जेल स्थानांतरित किया गया, जहां उन्हें दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं तक पहुंच नहीं दी गई।
उनकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि उन्हें लेह में घर पर नजरबंद कर दिया गया है और वांगचुक द्वारा स्थापित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) के छात्र और कर्मचारी उत्पीड़न, डराने-धमकाने और पूछताछ का सामना कर रहे हैं।
‘राज्य की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई’ का आरोप
गीतांजलि आंगमो ने याचिका में दावा किया है कि वांगचुक को जोधपुर भेजना, HIAL संस्थान के छात्रों का उत्पीड़न और पत्नी को नजरबंद रखना, ये सभी राज्य की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का उदाहरण हैं।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि—
- सोनम वांगचुक को तुरंत पेश किया जाए,
- उन्हें चिकित्सकीय सुविधा और आवश्यक दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाएं,
- और HIAL पर जारी प्रशासनिक दबाव को रोका जाए।
हिरासत से उपजा जनमानस में आक्रोश
याचिका में यह भी कहा गया है कि वांगचुक की गिरफ्तारी से लद्दाख के नागरिकों में गहरा आक्रोश और मानसिक पीड़ा है।
यहां तक कि लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के एक सदस्य ने वांगचुक की गिरफ्तारी से उत्पन्न अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली, जिसकी रिपोर्ट याचिका में संलग्न की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की सूची के अनुसार, यह मामला 6 अक्टूबर को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आएगा।
याचिका में गृह मंत्रालय, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और जोधपुर जेल अधीक्षक को पक्षकार बनाया गया है।
लद्दाख में संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरणीय न्याय की आवाज़ उठाने वाले सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने अब एक बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक विवाद खड़ा कर दिया है।
अब पूरा देश 6 अक्टूबर की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निगाहें टिकाए हुए है, क्या न्यायालय वांगचुक की तत्काल रिहाई का आदेश देगा या NSA के तहत हिरासत बरकरार रहेगी, यह सुनवाई तय करेगी।









