अगरतला। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने राज्य के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार से बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं (EAP) की सीमा बढ़ाने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने हाल ही में दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर राज्य के लिए यह सीमा कम से कम 10,000 करोड़ रुपये करने का अनुरोध किया।
साहा ने कहा कि फिलहाल पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ईएपी की अधिकतम सीमा 3,000 करोड़ रुपये तय है, जबकि अन्य राज्यों के लिए ऐसी कोई सीमा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि त्रिपुरा जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य के लिए यह सीमा विकास परियोजनाओं के विस्तार में बाधा बन रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया,
“मैंने वित्तमंत्री से आग्रह किया है कि या तो यह सीमा पूरी तरह हटा दी जाए या त्रिपुरा के लिए इसे 10,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाया जाए, ताकि राज्य की विकास योजनाएँ तेज़ी से लागू हो सकें।”
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय वित्तमंत्री ने इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि राज्य के वित्त सचिव दिल्ली जाकर केंद्र के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करें।
साहा ने कहा कि राज्य सरकार बुनियादी ढांचा विकास, जनकल्याण और पूंजीगत निवेश पर विशेष ध्यान दे रही है। उनके अनुसार,
“हमने राज्य के समग्र विकास के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निर्माण की प्रक्रिया शुरू की है। राज्य का वार्षिक बजट वित्त वर्ष 2024–25 में 27,000 करोड़ से बढ़ाकर 2025–26 में 32,000 करोड़ किया गया है। पूंजीगत व्यय के लिए 7,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) भी दे रही है, जिससे केंद्र और राज्य के कर्मचारियों के बीच जारी वेतन अंतर को धीरे-धीरे कम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा सरकार का लक्ष्य है कि राज्य को “विकास, पारदर्शिता और कल्याण के मॉडल” के रूप में स्थापित किया जाए। मुख्यमंत्री के अनुसार, अगर केंद्र सरकार ईएपी सीमा बढ़ाने पर सहमत होती है, तो इससे न केवल राज्य की आधारभूत परियोजनाओं में तेजी आएगी, बल्कि त्रिपुरा के समग्र आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।






