नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि उनके परिवार को नयी दिल्ली के पंडारा पार्क स्थित सरकारी बंगले से जबरन निकाल दिया गया, जबकि मामला अदालत में विचाराधीन है।
उन्होंने इसे दलितों और गरीबों के प्रति “उत्पीड़न” करार दिया। पूर्व सांसद की पत्नी एवं सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी सीमा राज को आवंटित यह बंगला था। सीमा राज ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 31 मई तक के लाइसेंस शुल्क का भुगतान कर दिया था और नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत तक समय मांगा था ताकि वे कामकाज समेट सकें और दूसरा आवास ढूंढ सकें।
उदित राज ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई जातिगत भेदभाव के कारण की गई और कहा कि एक निचली जाति के विपक्षी नेता को निशाना बनाया गया, जबकि उच्च जाति के कई लोग अब भी सरकारी बंगलों पर कब्जा किए हुए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। पूर्व सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वीडियो साझा कर अपने बंगले से सामान फेंके जाने की घटना दिखाई और कहा कि उन्हें अदालत के फैसले का पालन करना है, लेकिन यह जल्दबाजी और अत्याचार सवाल खड़े करती है।
सीमा राज ने बताया कि उनके पिता की गंभीर बीमारी और हाल ही में उनका निधन हुआ था, जिस कारण उन्होंने बंगले की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संपदा निदेशालय के अधिकारी अदालत की अगली सुनवाई से कुछ दिन पहले बेदखली का नोटिस जारी कर दिया। उदित राज ने कहा कि कांग्रेस में शामिल होने से पहले 2014 से 2019 तक वे भाजपा सांसद थे और उन्होंने कहा, “मैं सामाजिक न्याय की लड़ाई में पीछे नहीं हटूँगा। जो लोग निर्धारित समय से ज़्यादा समय तक रुके हुए हैं, उनके लिए भी यही पैमाना क्यों नहीं अपनाया जाता?” इस मामले पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।









