सुप्रीम कोर्ट ने एक साल अपील करने पर रोक लगाई : पांच अन्य की स्वीकृत
लोकवाहिनी, संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दंगों की साजिश से जुड़े मामले के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया। लेकिन भागीदारी के स्तर के कम का हवाला देते हुए पांच अन्य को जमानत दे दी और कहा कि मामले में सभी आरोपी एक ही पायदान पर नहीं हैं। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि खालिद और शरजील के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
उसने कहा कि ये दोनों जेल में रहेंगे लेकिन अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद के खिलाफ आपराधिक साजिश में शामिल होने के पर्याप्त सबूत हैं। इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती है। जिन पांच लोगों को जमानत मिली है, उनके नाम हैं गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद। सभी सातों आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया था।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने की। बेंच ने फैसला सुनाने से पहले लंबा आदेश पढ़ा और फिर अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ ऐसे सबूत मौजूद हैं, जिससे उनके साजिश में शामिल होने की पुष्टि होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जमानत के मामले में सभी आरोपियों को एक जैसा नहीं माना जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा, उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका बाकी आरोपियों से अलग और ज्यादा गंभीर है। हर आरोपी की भूमिका अलग-अलग देखकर ही फैसला किया जाना चाहिए।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कोई अचानक हुआ प्रदर्शन नहीं था, बल्कि राज्य को अस्थिर करने की सुनियोजित साजिश थी। पुलिस के अनुसार, यह एक पैन-इंडिया यानी देशभर में चली साजिश थी, जिसका मकसद सरकार को अस्थिर करना और आर्थिक नुकसान पहुंचाना था।






