अनिल मिश्रा और मनुस्मृति का दहन, देशद्रोह की मांग
संविधान के अपमान पर भीम आर्मी का सख्त रुख
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी और उनकी तस्वीर जलाने की घटना के तीव्र विरोध की लहर महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के खामगांव शहर में देखने को मिली। इस घटना से आक्रोशित भीम आर्मी संगठन ने खामगांव स्थित उपविभागीय अधिकारी कार्यालय के सामने जोरदार निषेध आंदोलन किया। आंदोलन के दौरान ग्वालियर के अनिल मिश्रा और मनुस्मृति की प्रतियों का दहन कर विरोध दर्ज कराया गया।
भीम आर्मी कार्यकर्ताओं का कहना है कि अनिल मिश्रा द्वारा दिया गया बयान न केवल डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का अपमान है, बल्कि यह सीधे तौर पर भारतीय संविधान पर हमला है। इसके साथ ही कुछ युवकों द्वारा सार्वजनिक रूप से बाबासाहेब की तस्वीर जलाने की घटना ने पूरे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। इस घटना को लेकर दलित समाज सहित संविधान प्रेमियों में भारी रोष व्याप्त है।
आंदोलन के माध्यम से भीम आर्मी ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकरण में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए। साथ ही भारतीय दंड संहिता और अत्याचार प्रतिबंधक (एट्रोसिटी) कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में जातीय और सामाजिक तनाव पैदा करने का काम करती हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भीम आर्मी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो संगठन संवैधानिक तरीके से आंदोलन को और तीव्र करेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित थे, जिन्होंने संविधान और बाबासाहेब आंबेडकर के सम्मान की रक्षा का संकल्प दोहराया।








