लोकवाहिनी, संवाददाता,नागपुर। विधानमंडल का शीतकालीन अधिवेशन सोमवार को आरंभ हुआ। कामकाज की शुरुआत में ही सरकार ने 75,286 करोड़ की पूरक मांग पेश की। अतिवृष्टि प्रभावित किसानों की सहायता के लिए सबसे अधिक निधि की दरकार की गई है। पूरक मांग पर 11 व 12 दिसंबर को सभागृह में चर्चा होगी।
विपक्ष का आरोप रहा है कि राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। राज्य की बड़ी आय कर्ज का ब्याज चुकाने में व्यय होती है। ऐसे में राज्य की आर्थिक व्यवस्था और बजट पर भी प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन सरकार की ओर से पहले से ही संकेत दिए जा रहे हैं कि किसान, महिला से संबंधित योजनाओं के लिए निधि की कमी नहीं होने दी जाएगी। ऐसे में माना जा रहा था कि 75 हजार करोड़ से अधिक की पूरक मांग पेश की जा सकती है। निधि के मामले में सरकार ने लाडली बहन योजना और कुंभ मेले की तैयारी को प्राथमिकता दी है। वर्ष 2024 में 35 हजार करोड़ की पूरक मांग पेश की गई थी। उसकी तुलना में इस बार दोगुना मांग की गई है। पिछली बार विकास, स्वास्थ्य व किसान योजना के लिए अधिक निधि की मांग की गई थी। मानसून अधिवेशन जून-जुलाई 2025 में 57,509.17 करोड़ व बजट अधिवेशन मार्च 2025 में 6,486 करोड़ की निधि की मांग की गई थी।
फडणवीस और पटोले में जुबानी जंग
शीतकालीन सत्र के दौरान इस सत्र की ‘संक्षिप्त’ अवधि को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कांग्रेस नेता नाना पटोले के बीच विधानसभा में तीखी बहस देखी गई। उपमुख्यमंत्री और वित्त विभाग का प्रभार संभाल रहे अजित पवार ने कार्यवाही शुरू होने पर जब कार्यसूची में सूचीबद्ध अनुपूरक मांगें पेश कीं, तो पटोले ने आपत्त जताई और सत्र की अवधि का मुद्दा उठाया, जो 14 दिसंबर को समाप्त हो रही है। उन्होंने मांग की कि नागपुर समझौते के अनुसार इसे कम से कम दो सप्ताह तक बढ़ाया जाए।
पटोले ने आरोप लगाया कि सरकार विस्तृत चर्चा की अनुमति देने के बजाय पहले ही दिन अनुपूरक मांगों और विधेयकों को पेश करने की जल्दबाजी में है। उन्होंने सदन में सवाल किया, “राज्य सरकार इतनी जल्दी में क्यों है?” इसपर हस्तक्षेप करते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि सत्र की अवधि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सर्वसम्मति से तय की गई थी।
हालांकि, यह बहस जब और तीखी हो गई, तब मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (विधायक) फडणवीस ने पटोले को याद दिलाया कि महा विकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में जब वह विधानसभा अध्यक्ष थे, तब विधानमंडल की बैठक केवल तीन से चार दिनों के लिए हुई थी, जबकि अन्य राज्यों में 20 दिनों तक के सत्र आयोजित किए थे। फडणवीस ने कहा कि नागपुर में सबसे लंबा शीतकालीन सत्र उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा, अब आप (पटोले) विधानसभा अध्यक्ष थे, तब कोई भी सत्र लंबा नहीं चला। उन दिनों सत्रों की औसत अवधि 4-5 दिन होती थी। केवल मेरे कार्यकाल के दौरान ही नागपुर सत्र लंबी अवधि का रहा है।









