प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने असम दौरे की शुरुआत एक खास अंदाज में की। उन्होंने ऊपरी असम के डिब्रूगढ़ स्थित एक चाय बागान का दौरा किया, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर मजदूरों से संवाद किया और उनके जीवन को करीब से समझने की कोशिश की।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने खासतौर पर महिला मजदूरों के साथ समय बिताया। करीब 19 महिलाओं के समूह के साथ उन्होंने अनौपचारिक बातचीत की, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और मजदूरी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
दौरे का सबसे खास पल तब देखने को मिला, जब पीएम मोदी खुद चाय के खेतों में उतरे और मजदूरों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ीं। उन्होंने पारंपरिक टोकरी में पत्तियां रखीं, जो स्थानीय श्रमिकों के जीवन से जुड़ने का एक प्रतीकात्मक प्रयास माना जा रहा है। इस दौरान सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला, जब स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक झुमुर और बिहू नृत्य प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने इस प्रस्तुति की सराहना की और कलाकारों से मुलाकात भी की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर इस अनुभव को साझा करते हुए लिखा कि “असम की चाय पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और यहां के लोगों से मिलना एक यादगार अनुभव रहा।”
चाय बागान के दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोहनबाड़ी एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए, जहां से वे गोगामुख और विश्वनाथ में चुनावी रैलियों को संबोधित करने पहुंचे। यह दौरा 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र बेहद अहम माना जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केरल में आम लोगों के बीच बस यात्रा कर जनसंपर्क साधा, जिससे चुनावी माहौल और तेज हो गया है।
असम में चाय बागान समुदाय एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है, और सभी राजनीतिक दल इस वर्ग को साधने की कोशिश में जुटे हैं।








