जंगल के बीच उम्मीद की किरण: किरंगी सर्रा गांव की महिलाओं को मशरूम उत्पादन से मिला नया जीवन
नागपुर:नागपुर जिले के पेंच टाइगर रिजर्व अंतर्गत चोरबाहुली वन परिक्षेत्र में स्थित किरंगी सर्रा गांव, जो घने जंगलों और जलाशय से घिरा हुआ है, आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रहा है। कभी रोजगार के अभाव से जूझ रहा यह दुर्गम गांव अब मशरूम उत्पादन के जरिए विकास की ओर कदम बढ़ा रहा है।
गांव की भौगोलिक स्थिति बेहद कठिन है—पारशिवणी तहसील से सीधा संपर्क न होने के कारण यहां के ग्रामीणों को रोजगार के लिए जंगलों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन ‘कोर ज़ोन’ में आने के कारण वन विभाग के नियमों ने उनकी आजीविका पर भी असर डाला। ऐसे में गांव के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया था। इसी चुनौती के बीच चोरबाहुली के वनपरिक्षेत्र अधिकारी जयेश तायडे ने पहल करते हुए गांव में मशरूम उत्पादन का अभिनव उपक्रम शुरू किया। इस पहल ने गांव की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया है।
आज गांव की 18 से 20 महिलाएं घर पर ही प्लास्टिक बैग में मशरूम उगाकर एक महीने के भीतर उत्पादन तैयार कर रही हैं। इस ताजे मशरूम को चोरबाहुली गेट पर आने वाले पर्यटकों को बेचा जाता है, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। महिलाओं ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब उन्हें जंगलों में भटकना नहीं पड़ता और घर बैठे ही रोजगार मिल रहा है। इस पहल से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
इस उपक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र सहायक गणेश खंडाईत, वनरक्षक कृष्णा बेलकर और प्रियांका झारखंडे का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
यह छोटा प्रयास अब बड़े बदलाव की कहानी बन चुका है—जहां जंगल के बीच बसे इस गांव में मशरूम उत्पादन से स्वावलंबन की नई रोशनी फैल रही है।









