मराठवाड़ा में किसानों की कर्जमाफी को लेकर सियासत तेज हो गई है। क्रांतिकारी शेतकरी संघटना के मराठवाड़ा अध्यक्ष गजानन कावरखे ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए किसानों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है।
गजानन कावरखे ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग और आठवां वेतन आयोग लागू करते समय कोई शर्तें नहीं लगाती, लेकिन किसानों की कर्जमाफी के समय कई तरह की अड़चनें और नियम लागू किए जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसानों के साथ ही यह दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है। उन्होंने उद्योगपतियों के कर्ज माफी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लाखों करोड़ रुपये का कर्ज बिना शर्त ‘राइट ऑफ’ कर दिया जाता है, लेकिन जब बात किसानों की आती है तो सरकार उनकी संपत्ति, गाड़ी और मकान देखकर कर्जमाफी देने की बात करती है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
कावरखे ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के फैसलों का भी विरोध करते हुए कहा कि किसानों के दर्द को समझे बिना ऐसे फैसल लिए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह धोखाधड़ी कर्जमाफी हमें स्वीकार नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि कर्जमाफी देनी है तो बिना शर्त कम से कम 5 लाख रुपये तक की कर्जमाफी की जाए या फिर किसानों का सातबारा पूरी तरह कोरा किया जाए। साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट को भी खारिज करते हुए कहा कि यह जमीनी हकीकत से दूर है। कावरखे की इस मांग के बाद किसानों के मुद्दे पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है और सरकार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।
कर्जमाफी पर शर्तों के खिलाफ गजानन कावरखे का सरकार पर हमला
कर्मचारियों को बिना शर्त लाभ, किसानों के साथ भेदभाव क्यों?
5 लाख तक कर्जमाफी या सातबारा कोरा करने की मांग
उद्योगपतियों के कर्ज माफ, किसानों पर नियमों का बोझ









