मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रोहित पवार ने प्रवर्तन निदेशालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी दादी से जुड़े मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने स्पष्ट कर दिया है कि बैंक में कोई अनियमितता नहीं हुई, फिर भी प्रवर्तन निदेशालय यह मामला छोड़ने को तैयार नहीं है।
रोहित पवार का दावा है कि 26 जनवरी को यह मामला दिल्ली पहुंचा और वहां से संबंधित नेताओं को कार्रवाई से न छोड़ने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि वे संघर्ष के लिए तैयार हैं और यह धारणा गलत है कि वे दबाव में आकर पीछे हट जाएंगे।
राजनीतिक घटनाक्रम पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि 35 विधायकों ने सुनेत्रा पवार का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया है और इसके लिए उन्होंने उन्हें बधाई दी। साथ ही आरोप लगाया कि कुछ विधायकों को विलय के मुद्दे पर बोलने से रोका जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अंदरूनी और बाहरी राजनीतिक संघर्ष की जानकारी दिवंगत नेता को थी, लेकिन उनके निधन के बाद इस विषय को विराम मिल गया। कुछ नेताओं को अपने हाशिये पर जाने का डर है, इसलिए वे विलय के पक्ष में नहीं हैं।
रोहित पवार ने संबंधित दुर्घटना की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।








