लोकवाहिनी, संवाददाता गढ़चिरौली। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में 18 दलों के लगभग 800 जवानों ने एक अभियान चलाकर 44 नक्सली स्मारकों को ध्वस्त कर दिया। गढ़चिरौली जिले में नक्सलियों के सफाए के साथ माओवादी आतंक के आखिरी बचे प्रतीकों को नष्ट करने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है।
गढ़चिरौली जिला, जो एक समय चरमपंथी क्षेत्र माना जाता रहा है, विगत कई सालों से यहाँ नक्सलियों के मामले में अत्यधिक संवेदनशील रहा। यहाँ के लोगों के मन में आतंक पैदा करने और अपने खून-खराबे के साथ आक्रामक अस्तित्व को दिखाने के लिए नक्सलियों द्वारा दूरदराज बीहड़ इलाकों में नक्सली स्मारकों का निर्माण किया गया था। गढ़चिरौली पुलिस बल द्वारा माओवादियों के आतंक का प्रतीक, जिले भर के कुल 44 नक्सली स्मारकों को आज नष्ट कर दिया गया है।
गढ़चिरौली जिले में यह देखा गया कि नक्सलियों ने कई स्थानों पर लोगों के मन में भय पैदा करने के लिए स्मारक बनाए थे। इसके कारण वरिष्ठ नागरिकों के मार्गदर्शन में पुलिस बल ने सुरक्षा एवं उपाय किए। 18 फरवरी को 16 बीडीडीएस (BDDS) दल, विशेष मिशन दल, सीआरपीएफ और विभिन्न चौकियों/उप-चौकियों पर कुल 18 टीमों ने जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में तलाशी अभियान शुरू किया। महाराष्ट्र सीमा में कुल 44 स्मारक नक्सलियों द्वारा निर्मित पाए गए। उक्त नक्सली स्मारकों और क्षेत्रों का बीडीडीएस टीम द्वारा गहन निरीक्षण किया गया और उसके बाद जवानों ने उक्त स्मारकों को नष्ट कर दिया।
इसमें कुल 44 नक्सली स्मारक शामिल हैं। एटापल्ली उपखंड में 18, हेडरी उपखंड में 17, भामरागढ़ उपखंड में 05, जिमलगट्टा उपखंड में 02, धानोरा उपखंड में 01 और पेंडरी उपखंड में 01 स्मारक शामिल हैं। नक्सल सेल के मुताबिक नक्सलियों के लिए यह क्षेत्र सुरक्षित माना जाता रहा है। ये अत्यंत दूरस्थ पेंगुडा, किड, तमारकोथी, गादवाड़ा, नागरी और गट्टा जैसे अन्य गांवों में नक्सलियों के स्मारकों को नष्ट करके गढ़चिरौली पुलिस बल ने क्षेत्र के नागरिकों के बीच बचे नक्सलियों के निशान और उनके आतंक को समाप्त कर दिया है।












