नई दिल्ली। भारतीय ध्वज वाले दो और एलपीजी टैंकर युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर गए हैं और दो से ढाई दिन में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेंगे। एलपीजी टैंकर ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ जलडमरूमध्य को पार करने से पहले सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए। दोनों एक-दूसरे के करीब चल रहे हैं। इन जहाजों पर लदी गैस देश में लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस (LPG) की खपत के बराबर है। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने से जुड़े आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि दोनों जहाजों पर लगभग 92,000 टन एलपीजी है। उन्होंने कहा, “यात्रा शुरू हो चुकी है।” उन्होंने अंतिम गंतव्य बंदरगाह का खुलासा किए बिना बताया कि खाड़ी से भारत तक पहुंचने में जहाजों को आमतौर पर दो से ढाई दिन लगते हैं।
जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों से पता चलता है कि संभवतः जलडमरूमध्य को पार करने से पहले ईरानी अधिकारियों को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए दोनों एलपीजी टैंकर ईरान के लारक और केशम द्वीपों के बीच के जलक्षेत्र से होकर गुजरे। ये दोनों जहाज उन 22 भारतीय झंडे वाले जहाजों में शामिल हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद फारस की खाड़ी में फंस गए थे। इसका कारण युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य का लगभग बंद होना है। होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच का संकरा जलमार्ग है जो तेल और गैस उत्पादक खाड़ी देशों को शेष विश्व से जोड़ता है।
इससे पहले, लगभग 92,712 टन एलपीजी ला रहे एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं। यह देश की लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है। अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले और ईरान के पलटवार के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। उस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले 28 भारतीय जहाज मौजूद थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे।
पिछले कुछ दिनों में, दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य तक पहुंचने में सफल रहे हैं। एलपीजी ला रहा जहाज शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा। वहीं एक अन्य एलपीजी टैंकर नंदा देवी, अगले दिन गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। दोनों एलपीजी वाहक जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की थी और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया था।
संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चे तेल से लदा भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ 18 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। एक अन्य टैंकर, ‘जग प्रकाश’ जो तंजानिया जा रहा था, पहले ही सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य को पार कर चुका है। यह ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा था। युद्ध क्षेत्र में बचे हुए 24 भारतीय झंडे वाले जहाजों में से 22 जलडमरूमध्य के पश्चिमी भाग में हैं, जिनमें 611 नाविक सवार हैं, जबकि दो पूर्वी भाग में हैं।








