नंदुरबार जिले के नवापुर तहसील के डोकारे स्थित आदिवासी सहकारी साखर कारखाना भारी कर्ज के कारण बंदी के कगार पर पहुंच गया है। धुले एवं नंदुरबार जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक का 10 करोड़ 51 लाख रुपये का कर्ज बकाया रहने के चलते प्रशासन ने जप्ती की बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी के आदेशानुसार नवापुर के तहसीलदार दत्तात्रय जाधव ने पुलिस बंदोबस्त में कारखाने का ताबा लेकर उसे बैंक को सौंप दिया।
कारखाने के मुख्य द्वार और प्रशासनिक कार्यालयों को सील कर पूरे परिसर को बंद कर दिया गया, जिससे क्षेत्र में हलचल मच गई है। कारखाने ने इस कार्रवाई के खिलाफ ऋण वसूली अधिकरण, छत्रपति संभाजीनगर में स्थगन का प्रयास किया, लेकिन न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।
जप्ती के दौरान कारखाने की मुख्य साइट, वाहन तळ, पेट्रोल पंप, ईटीपी विभाग, कर्मचारी आवास, शैक्षणिक परिसर सहित विभिन्न संपत्तियों का ताबा लिया गया। यह कारखाना करीब 26 वर्ष पूर्व आदिवासी विकास के उद्देश्य से शुरू किया गया था और 24 वर्षों तक सुचारु रूप से चला, लेकिन पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है।
कारखाने के बंद होने से क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। अब कारखाने के भविष्य को लेकर किसानों और स्थानीय नागरिकों में चिंता बढ़ गई है।








