लोकवाहिनी, संवाददाता:पुणे। नीट 2026 के कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के संबंध में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है इनमें 3 आरोपी महाराष्ट्र से, 3 आरोपी जयपुर से और 1 गुरुग्राम से पकड़ा गया है। इसके अलावा कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। अब तक की जांच में बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली और झारखंड समेत कई राज्यों में जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। सीबीआई की विशेष टीमें लगातार अलग-अलग राज्यों में छापेमारी और पूछताछ कर रही हैं। वहीं बुधवार को एनटीए हेडक्वार्टर में भी पहुंचकर जांच की।
देशभर में हलचल मचाने वाले नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई की कार्रवाई तेज हो गई है और कल नासिक से पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। नासिक से दो लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद आज पुणे से एक महिला को हिरासत में लिया गया। नीट का नासिक कनेक्शन सामने आने के बाद पुणे पुलिस ने आज सुबह-सुबह मनीषा वाघमारे नाम की महिला को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने जानकारी दी है कि संबंधित महिला ब्यूटी पार्लर चलाती है। 46 वर्षीय मनीषा पुणे के बिबवेवाड़ी इलाके में रहती है और संदेह है कि यह वही थी जो छात्रों को आरोपियों तक ले गई थी। पुलिस ने महिला को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया क्योंकि यह संदेह था कि संबंधित महिला ने छात्रों को आरोपियों तक पहुंचाया था। पुलिस को शक है कि यह महिला अहिल्यानगर से गिरफ्तार किये गये धनंजय लोखंडे की मदद कर रही है। साथ ही जांच में पता चला है कि मनीषा छात्रों को धनंजय लोखंडे तक पहुंचाने का काम करती है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। धनंजय लोखंडे और मनीषा वाघमारे के बीच कुछ व्हाट्सएप कॉल और मैसेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं। पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ये कार्रवाई की है, सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि आज शाम तक मनीषा वाघमारे को सीबीआई को सौंप दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दोबारा परीक्षा कराने की मांग
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने की मांग की गई है। फेमा ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली से अब भरोसा उठ चुका है। इसलिए मौजूदा गवर्निंग बॉडी का पुनर्गठन किया जाना चाहिए। एडवोकेट तन्वी दुबे के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया है कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि एनटीए की जगह “तकनीकी रूप से उन्नत, अधिक सुरक्षित और स्वायत्त” परीक्षा निकाय का गठन करे।












