नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि संघ की ‘प्रार्थना’ केवल एक गीत या औपचारिक संस्कार नहीं, बल्कि देश और ईश्वर के प्रति स्वयंसेवकों का सामूहिक संकल्प है। इस अवसर पर संघ की प्रार्थना का ऑडियो रिलीज किया गया, जिसे प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन ने आवाज दी, जबकि हिंदी में इसका अर्थ हरीश भिमानी और मराठी में अभिनेता सचिन खेडेकर ने समझाया।
भागवत ने कहा, “यह प्रार्थना भारत माता के प्रति भक्ति, प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति है। इसमें हम यह दर्शाते हैं कि हम देश को क्या दे सकते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हमें देश की सेवा करने की शक्ति और मार्गदर्शन दें।” उन्होंने बताया कि ऑडियो के माध्यम से यह प्रार्थना अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचेगी और स्वयंसेवकों को सामूहिक संकल्प में मदद करेगी।
प्रार्थना की विशेषताएँ
- यह प्रार्थना लंदन के स्टूडियो में रॉयल फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा के साथ रिकॉर्ड की गई, जिसमें सभी विदेशी संगीतकार शामिल थे।
- प्रार्थना में आठ अलग-अलग भाषाओं में वॉइस-ओवर दिए गए हैं।
- मूल संघ प्रार्थना का रचनाकार नरहरि नारायण भिड़े थे और यह पहली बार 23 अप्रैल 1940 को पुणे में संघ शिक्षा वर्ग में यादव राव जोशी द्वारा गाई गई थी।
- प्रार्थना का प्रारंभिक प्रारूप 1939 में पुणे में हुई एक बैठक के दौरान तैयार किया गया था।
भागवत ने कहा कि संघ की यह प्रार्थना केवल सांस्कृतिक या धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह स्वयंसेवकों को भारत माता के प्रति भक्ति, प्रेम और समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
संघ प्रमुख के अनुसार, यह प्रार्थना आज भी सहयोग, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का माध्यम बनी हुई है और आने वाले समय में यह और अधिक लोगों तक पहुँचने की उम्मीद है।









