नयी दिल्ली। देश में ऑटोमोबाइल उद्योग में एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद हैचबैक कारें अपने महत्व और बाजार प्रासंगिकता को बरकरार रखेंगी। यह राय फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने व्यक्त की है, जो उद्योग में शुरुआती स्तर की छोटी कारों के भविष्य को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आई है।
फाडा के अध्यक्ष सी एस विग्नेश्वर ने पीटीआई- न्यूज़ एजेंसी भाषा से बातचीत में कहा, “उद्योग में एसयूवी का प्रभाव पूरी दुनिया में बढ़ रहा है। ऐसा केवल इसलिए नहीं कि भारत में सड़कें खराब हैं। एसयूवी आराम, स्टाइल और सुरक्षा का वादा करती हैं, जबकि हैचबैक का अपना अलग स्थान रहेगा, क्योंकि कुछ उपभोक्ता अभी भी हैचबैक पसंद करते हैं।”
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया को जीएसटी दरों में कटौती के बाद शुरुआती स्तर की छोटी कारों के भाग में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। मारुति सुजुकी इस भाग में अपने मजबूत दबदबे के लिए जानी जाती है। वहीं, हुंदै मोटर इंडिया का मानना है कि उपभोक्ताओं की बदलती पसंद के चलते हैचबैक की कीमत पर एक्सटर और पंच जैसी माइक्रो एसयूवी की बिक्री बढ़ेगी।
विग्नेश्वर ने बताया कि छोटी कारों के खरीदार लगातार बने हुए हैं और ऑटो निर्माता इस खंड में कई नए उत्पाद पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हैचबैक अपने कॉम्पैक्ट आकार, बेहतर ईंधन दक्षता और शहर की भीड़भाड़ में आसानी से चलने की वजह से महत्वपूर्ण बनी रहेंगी। वहीं, एसयूवी बड़े आकार, अधिक ग्राउंड क्लीयरेंस और सुरक्षा के कारण लोकप्रिय हैं। सेडान बाजार पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन इसकी अपनी मांग बनी हुई है।”
हैचबैक, सेडान और एसयूवी के बीच मुख्य अंतर उनके आकार, डिजाइन और उपयोगिता में है। हैचबैक छोटी और कॉम्पैक्ट होती है, रोजमर्रा की ड्राइविंग और शहर के लिए उपयुक्त है। सेडान तीन बॉक्स बॉडी पर आधारित होती है, जिसमें इंजन, यात्रियों का बैठने का हिस्सा और अलग ट्रंक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। एसयूवी अपनी ऊंचाई, बड़ी बॉडी और बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस के कारण परिवार और लंबी यात्राओं के लिए पसंद की जाती है।
फाडा का यह विश्लेषण संकेत देता है कि भारतीय ऑटो बाजार में विविध विकल्प जारी रहेंगे, जहां एसयूवी का वर्चस्व बढ़ेगा, लेकिन हैचबैक अपने विशिष्ट उपयोग और उपभोक्ता आधार के कारण टिके रहेंगे।









