नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में बुधवार को देशभर में 57 नये केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidyalaya) खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस कदम से आने वाले वर्षों में 86 हजार से अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि इन 57 नए विद्यालयों में से सात केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा और शेष राज्य सरकारों के सहयोग से स्थापित किए जाएंगे। इनमें से 20 विद्यालय ऐसे जिलों में खोले जाएंगे जहां केंद्र सरकार के कर्मचारियों की बड़ी संख्या होने के बावजूद अभी तक कोई केंद्रीय विद्यालय उपलब्ध नहीं है।
5862 करोड़ रुपये होंगे खर्च
सरकार ने बताया कि इन विद्यालयों की स्थापना के लिए 2026–27 तक नौ वर्षों की अवधि में कुल 5862.55 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इसमें 2585.52 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय और 3277.03 करोड़ रुपये परिचालन व्यय शामिल होगा।
पहली बार शामिल होगा ‘बालवाटिका चरण’
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को ध्यान में रखते हुए पहली बार इन विद्यालयों में बालवाटिका (Pre-Primary) स्तर से शिक्षा शुरू करने की योजना है। इससे तीन वर्ष के आधारभूत चरण को भी जोड़ा जाएगा।
वंचित और रणनीतिक क्षेत्रों पर फोकस
सरकारी बयान के अनुसार, यह निर्णय वंचित जिलों, आकांक्षी जिलों, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों, पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है। इस प्रस्ताव में कुल 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
इनमें 14 विद्यालय आकांक्षी जिलों में, चार विद्यालय नक्सल प्रभावित जिलों में और पांच विद्यालय पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी इलाकों में स्थापित होंगे।
केन्द्रीय विद्यालयों का नेटवर्क होगा और मज़बूत
वर्तमान में देशभर में 1,288 केंद्रीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें मास्को, काठमांडू और तेहरान स्थित तीन विद्यालय भी शामिल हैं। इनमें लगभग 13.62 लाख छात्र नामांकित हैं।
दिसंबर 2024 में सरकार ने 85 नये केंद्रीय विद्यालयों की स्वीकृति दी थी। अब 57 और विद्यालयों को मंजूरी मिलने से केन्द्रीय विद्यालय संगठन (KVS) का नेटवर्क और विस्तृत होगा, जो देशभर में एक समान और उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम है।










