धादरी-उमरी क्षेत्र में दहशत का माहौल, इससे पूर्व एक ही दिन छह लोगों पर हुआ था हमला
लोकवाहिनी, संवाददाता
तिरोड़ा। गोंदिया जिले के तिरोड़ा तहसील के धादरी-उमरी क्षेत्र में जंगली सुअरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। जंगली सुअरों के लगातार हमलों से कई किसान और नागरिक घायल हो चुके हैं। 23 अगस्त को भी खेत में गए दो किसानों पर जंगली सुअरों ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। लगातार हो रही घटनाओं के कारण क्षेत्र के किसानों और नागरिकों में भय का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, 23 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे खेत पर गए महिपाल शेंडे (61), निवासी धादरी और वामन भलाधरे (57), निवासी तिरोड़ा पर जंगली सुअरों ने हमला कर दिया। दोनों को गंभीर चोटें आई हैं। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
धादरी-उमरी क्षेत्र में जंगली सुअरों के हमले की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई किसान और नागरिक इनके हमलों का शिकार हो चुके हैं। विशेष रूप से से 13 अगस्त को एक ही दिन पागल हुए जंगली सुअरों ने छह लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था। लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीणों की सुरक्षा का सवाल गंभीर बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों, गांवों और सड़कों के आसपास जंगली सुअरों की संख्या और आवाजाही लगातार बढ़ रही है। जंगली सुअरों के बढ़ते उपद्रव को लेकर वन विभाग को पहले भी कई बार सूचना दी गई थी। 23 अगस्त को वनरक्षक चंद्रकुमार पारधी के नेतृत्व में करीब 10 वनकर्मियों ने धादरी-उमरी क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान चलाया। वन विभाग की टीम ने जंगली सुअरों को पकड़ने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन अधिकांश जंगली सुअर भागने में सफल रहे। अभियान के दौरान केवल एक जंगली सुअर का बच्चा पकड़ा जा सका। बाद में उसे वन विभाग द्वारा तैयार किए गए सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया।
खेती का मौसम, खेतों में जाने से डर रहे किसान
वर्तमान में खेती का मौसम चल रहा है। धान की फसल में दवा का छिड़काव, निराई-गुड़ाई और अन्य कृषि कार्य बड़े पैमाने पर चल रहे हैं। लेकिन जंगली सुअरों के हमलों के डर से कई किसान खेतों में जाने से बच रहे हैं। किसानों के सामने अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि यदि खेतों में जाना ही सुरक्षित नहीं है तो फसलों की देखभाल और जरूरी कृषि कार्य कैसे किए जाएं। गंभीर रूप से घायल दोनों किसानों के उपचार और वन विभाग से नियमानुसार मुआवजा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ऐसा वन विभाग की ओर से बताया गया है। विभाग का कहना है कि पहले गंभीर रूप से घायल लोगों को भी उचित मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की गई है। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि अब तक किसी भी घायल व्यक्ति को वास्तविक आर्थिक सहायता नहीं मिली है। वन क्षेत्रधिकारी प्रशांत हुमने से इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि शहर, गांव, खेत और सड़कों पर जंगली सुअरों की बढ़ती आवाजाही के कारण आम नागरिकों का जीवन खतरे में है। बार-बार हो रहे हमलों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। धादरी-उमरी के नागरिकों और किसानों ने सरकार तथा वन विभाग से जंगली सुअरों के बढ़ते आतंक पर तत्काल ठोस और स्थायी उपाय करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि वन विभाग ने जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो ग्रामीणों की ओर से तीव्र आंदोलन किया जाएगा।












