जयपुर/भोपाल: राजस्थान और मध्यप्रदेश में बच्चों की मौत से जुड़ा खांसी सिरप विवाद अब बड़े प्रशासनिक फैसलों तक पहुंच गया है। कथित तौर पर संदूषित खांसी की दवा से 11 बच्चों की मौत के बाद राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को कड़ा कदम उठाते हुए राज्य औषधि नियंत्रक राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया।
सरकार ने जयपुर की केसन्स फार्मा द्वारा निर्मित सभी 19 दवाओं की आपूर्ति और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है। इसके साथ ही ‘डेक्सट्रोमेथॉर्फन’ युक्त सभी खांसी की दवाओं का वितरण भी रोक दिया गया है।
मौतों से उपजा विवाद
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में नौ और राजस्थान में दो बच्चों की मौत खांसी की दवा से हुई बताई जा रही है। प्राथमिक जांच में दवा की गुणवत्ता और मानकों को लेकर गंभीर खामियां सामने आई हैं।
राजस्थान की प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौर ने बताया कि केंद्र सरकार ने पहले ही 2021 में चार साल से कम उम्र के बच्चों को डेक्सट्रोमेथॉर्फन देने के खिलाफ परामर्श जारी किया था, जिसे राज्य सरकार ने अब दोबारा लागू किया है।
सरकार की सख्ती
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस पूरे मामले की विशेष जांच के आदेश दिए हैं और एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की घोषणा की है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने भी तत्काल प्रभाव से रिपोर्ट तलब की है।
राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम लिमिटेड (आरएमएससीएल) के प्रबंध निदेशक पुखराज सेन ने खुलासा किया कि 2012 से अब तक केसन्स फार्मा की 10,000 से अधिक दवाओं के नमूने परीक्षण में लिए गए थे, जिनमें से 42 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
दवा पर सख्त नियम लागू
अधिकारियों का कहना है कि अब बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए संभावित रूप से हानिकारक दवाओं पर स्पष्ट चेतावनी लिखी जाएगी। राज्य सरकार ने साफ किया है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और मामले की गहन जांच के बाद जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा।
खांसी सिरप विवाद ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है। अब निगाहें इस जांच पर टिकी हैं कि आखिर बच्चों की मौत के पीछे कितनी लापरवाही और किसका दोष है।








