मुंबई। महाराष्ट्र के निकाय चुनावों से पहले चुनाव आयोग और राज्य चुनाव अधिकारियों ने डुप्लीकेट मतदाताओं के नामों की पहचान और उनका सत्यापन करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अधिकारियों ने उन मतदाताओं के नाम अस्थायी रूप से चिह्नित करने का फैसला किया है, जिनके नाम विभिन्न सीटों पर दर्ज हैं और संबंधित व्यक्तियों से उनके इच्छित निर्वाचन क्षेत्र की पुष्टि मांगी जाएगी।
यह कदम शिवसेना (उबाठा), कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) जैसी विपक्षी पार्टियों की शिकायतों के बाद उठाया गया है। इन दलों ने मतदाता सूची में विभिन्न पतों और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं के नामों के दोहराव का आरोप लगाया था।
कदम का मकसद और प्रक्रिया
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को कई बार सूचीबद्ध नामों की सूची साझा करने के लिए कहा गया है। सूची में कुछ नाम एक ही शहर के अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे सकते हैं, जबकि अन्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दोहराए गए हैं।
अधिकारी ने कहा,
“हमारे क्षेत्रीय अधिकारी संबंधित मतदाताओं से संपर्क करेंगे और उनके विवरणों की पुष्टि करेंगे। इसके बाद प्रत्येक मतदाता को अपने इच्छित निर्वाचन क्षेत्र का चयन करने के लिए कहा जाएगा, जहां वे अगले चुनाव में वोट देंगे।”
इसके बाद अद्यतन मतदाता सूची को बूथ स्तर के अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया जाएगा।
निकाय चुनाव की तैयारी
महाराष्ट्र में शहरी और ग्रामीण निकाय चुनाव 31 जनवरी, 2026 तक पूरे किए जाने हैं। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि डुप्लीकेट मतदाता पहचानने और सूची को सुधारने का यह कदम चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची की साफ-सफाई से राजनीतिक दलों को भी वास्तविक वोटर डेटा मिलेगा और किसी भी संभावित विवाद को पहले ही निपटाया जा सकेगा।
चुनाव अधिकारी अगले कुछ हफ्तों में क्षेत्रीय स्तर पर निरीक्षण करेंगे और मतदाताओं से व्यक्तिगत रूप से पुष्टि करेंगे। यह प्रक्रिया न केवल डुप्लीकेट नामों को हटाने में मदद करेगी, बल्कि सभी मतदाताओं के लिए स्पष्ट और अद्यतन रिकॉर्ड सुनिश्चित करेगी।











