नयी दिल्ली: भारत के प्रसिद्ध खगोल भौतिक विज्ञानी जयंत नारलीकर को 2025 के ‘विज्ञान रत्न पुरस्कार’ के लिए चुना गया है। नारलीकर का 86 वर्ष की आयु में 20 मई को निधन हो गया था। यह पुरस्कार विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
नारलीकर ने अपने जीवनकाल में ‘बिग बैंग’ सिद्धांत को चुनौती दी थी। उनके अनुसार ब्रह्मांड एक ही क्षण में उत्पन्न नहीं हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश खगोलशास्त्री फ्रेड हॉयल के साथ मिलकर यह प्रतिपादित किया कि ब्रह्मांड हमेशा से अस्तित्व में रहा है और अनंत काल तक नए पदार्थों का निरंतर निर्माण होता रहा।
सरकार ने 2025 के लिए आठ ‘विज्ञान श्री’ पुरस्कार विजेताओं की भी घोषणा की है। इन पुरस्कारों में शामिल हैं:
- ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (कृषि विज्ञान)
- यूसुफ मोहम्मद शेख (परमाणु ऊर्जा)
- के. थंगराज (जैविक विज्ञान)
- प्रदीप थलप्पिल (रसायन विज्ञान)
- अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित (इंजीनियरिंग विज्ञान)
- एस. वेंकट मोहन (पर्यावरण विज्ञान)
- माहन एमजे (गणित और कंप्यूटर विज्ञान)
- जयन एन (अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी)
इसके अतिरिक्त, 14 विज्ञान युवा पुरस्कार विजेताओं की भी घोषणा की गई। सीएसआईआर अरोमा मिशन टीम, जिसने जम्मू और कश्मीर में लैवेंडर मिशन शुरू किया, को विज्ञान टीम पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार, जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है, 2023 में शुरू किया गया था। इस बार जयंत नारलीकर को विज्ञान रत्न पुरस्कार से सम्मानित कर उनके योगदान को याद किया गया।









