पालघर (महाराष्ट्र)। न्याय की प्रक्रिया भले धीमी रही हो, लेकिन आखिरकार दो व्यक्तियों को 25 साल पुराने एक कथित डकैती प्रयास मामले में राहत मिल गई है। पालघर की एक अदालत ने सबूतों के अभाव में दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एच. ए. एस. मुल्ला ने 15 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाया, जिसकी प्रति मंगलवार को सार्वजनिक की गई। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी डकैती करने की नीयत से मौजूद थे।
2000 में वसई पुलिस ने टेम्पो रोका था, एक आरोपी मौके पर गिरफ्तार
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अप्रैल 2000 में मानिकपुर पुलिस थाने की एक गश्ती टीम ने उस टेम्पो को रोका था, जिसमें कथित तौर पर 5-6 लोग डकैती की योजना बना रहे थे।
इस दौरान पुलिस ने सुनील उर्फ कन्हैया सखाराम अग्रवाल को गिरफ्तार किया, जबकि बाकी लोग मौके से फरार हो गए।
पुलिस के मुताबिक, टेम्पो से चाकू, नकदी और अन्य संदिग्ध सामग्रियाँ बरामद की गई थीं।
इसके बाद अग्रवाल सहित नादसिंह नागरसिंह (अब दिवंगत), मंदिरसिंह नागरसिंह और कुछ अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था।
25 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राहत
अदालत ने अपने फैसले में बताया कि लगातार प्रयासों के बावजूद दो आरोपियों का पता नहीं चल पाया, वहीं नादसिंह की मौत के बाद उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
अंततः मामले में केवल दो आरोपी — अग्रवाल और मंदिरसिंह — ही ट्रायल का सामना कर रहे थे।
हथियार बरामद होना इरादे को साबित नहीं करता: अदालत
फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया:
“केवल हथियार मिलने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी डकैती ही करने वाले थे।”
अभियोजन पक्ष द्वारा इरादे और उद्देश्य को लेकर पुख्ता सबूत पेश न किए जाने के कारण दोनों को बरी कर दिया गया।










