नागपुर। किसानों की कर्ज़माफी और ‘कृषि भूमि अभिलेख’ की मांग को लेकर प्रहार जनशक्ति पार्टी के संस्थापक और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बच्चू कडू के नेतृत्व में चल रहा महा एल्गार मोर्चा अब नागपुर में बड़ा जनदबाव तैयार कर चुका है। अमरावती से निकली यह ट्रैक्टर रैली शहर के बाहरी हिस्सों में पहुंचने के साथ ही प्रशासन के लिए कड़ी चुनौती बन गई है।
मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने आंदोलन से लगे लंबे जाम पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी की है। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 यानी वर्धा रोड पर 20 किलोमीटर तक लंबा जाम लगने और एम्बुलेंस-पुलिस वाहनों तक की आवाजाही बाधित होने पर अदालत ने इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
न्यायमूर्ति रजनीश व्यास ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चू कडू और उनके समर्थक तुरंत राजमार्ग से हटें, ताकि आम जनता को राहत मिल सके। अदालत ने कहा कि नागपुर हवाईअड्डे और राष्ट्रीय कैंसर संस्थान तक पहुंचने के लिए यह सड़क बेहद जरूरी है, इसलिए इसे अवरुद्ध रखना अस्वीकार्य है। मामले की अगली सुनवाई 06 नवंबर को होगी।
इधर आंदोलन तेज़ होते ही नागपुर में सुरक्षा का घेरा और कसता जा रहा है। पुलिस को इनपुट मिला है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ शहर के वीवीआईपी क्षेत्र सिविल लाइंस की ओर बढ़ सकती है। इसी आशंका में मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास रामगिरी के आसपास कड़ी निगरानी बढ़ा दी गई है। वॉकर्स स्ट्रीट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है और रास्तों पर बैरिकेडिंग बढ़ी हुई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय के आसपास भी सुरक्षा मजबूत कर दी गई है। प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए लगातार रूट डायवर्ट कर रहा है। वर्धा, चंद्रपुर और हैदराबाद की ओर से आने वाला ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित है। बुटीबोरी-जामथा मार्ग पर यातायात ठप पड़ा है, जबकि मिहान पुल के पास प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दी है।
किसान नेताओं का जमावड़ा लगातार बढ़ रहा है। इस प्रदर्शन में किसान नेता राजू शेट्टी, विजय जावंधिया, पूर्व मंत्री महादेवराव जानकर और रविकांत तुपकर भी शामिल हो चुके हैं। बच्चू कडू खुद ट्रैक्टर चलाकर मोर्चे की अगुवाई कर रहे हैं, जिससे आंदोलन को और गति मिल रही है।
भीड़ के आंदोलन से संकेत मिल रहे हैं कि यह संघर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है और किसी भी पल बड़ा फैसला आ सकता है। नागपुर की सड़कों पर बनी इस उथल-पुथल के बीच अब सभी निगाहें अदालत और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं।










