लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। कार्यकर्ताओं को महत्व दिया जाए और सम्मान के साथ जीने का समान अवसर दिया जाए, इस माँग को लेकर अभियान के अवसर पर सरकार के समक्ष अपनी माँगें मंगलवार को अपने हजारों आयटक कार्यकर्ताओं मजदूरों के वेतन में संशोधन करने, श्रमिकों के श्रम को उचित पारिश्रमिक देने की माँग को लेकर मेहनतकश श्रमिकों के संगठन आयटक के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारियों ने सुबह 11 बजे से विधानमंडल की ओर मार्च किया।
दोपहर करीब दो बजे जैसे ही ये सभी प्रदर्शनकारी टेकरी मार्ग पर दाखिल हुए तो भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर से ही महिलाएँ येन-केन-प्रकारेण धरना स्थल पर पहुँच रहे थे। इस बीच भीड़ इतनी थी कि देरी के कारण सड़क पर पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड भी हटाने लगे। मार्च करने वालों को उस होते देख पुलिस भी आक्रमक हो गई। इसी असमंजस के चलते महिलाओं की पुलिस से बहस हो गई।
इस बीच माहौल बढ़ने पर शांतिपूर्ण मार्च ने अचानक आक्रमक रूप ले लिया। एक भी गड़बड़ी से पूरे मार्ग के दौरान अफ़रा-तफ़री मच सकती थी परन्तु कुछ देर बाद स्थिति साफ होने पर सभी ने राहत की साँस ली। तीसरे दिन का मुख्य आकर्षण बने इस मार्च में करीब 9 हजार प्रदर्शनकारियों ने हिस्सा लिया। इससे टेकरी मार्ग की दोनों सड़कों पर जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों के सड़क के दोनों ओर कब्ज़ा जमा लेने से इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। अधिक आक्रामक हुए प्रदर्शनकारियों ने यह रूख अख्तियार कर लिया कि अगर वन विभाग के मंत्री नहीं आएँगे तो वे पीछे नहीं हटेंगे। अंततः पुलिस ने संज्ञान लिया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करते हुए संबंधित विभागों के मंत्रियों से चर्चा करने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल विधानमंडल भेजा।
अंदर और बाहर दोनों तरफ से दुविधा
इस घटना में जिले के बाहर से मार्च के लिए आए कुछ पदयात्री दोपहर में निकलना चाह रहे थे। इसलिए कुछ प्रदर्शनकारियों ने बाहर निकलने की कोशिश की। परन्तु वे अन्दर और बाहर दोनों ओर से हैरान थे। भीड़ के कारण प्रदर्शनकारी मार्च के बीच अपना रास्ता नहीं बना सके और पुलिस ने उन्हें बाहर नहीं जाने दिया। इससे और भ्रम पैदा हो गया। इस मार्च में बड़ी संख्या में महिलाएँ भी थीं। इसकी तुलना में, महिला पुलिस बल की स्थिति अपर्याप्त थी, जिससे और अधिक भ्रम पैदा हुआ।









