नागपुर। संभागीय आयुक्त ने महापौर चुनाव के लिए 6 फरवरी की तारीख तय कर दी है। लेकिन महापौर पद को लेकर भाजपा की दुविधा अभी भी बनी हुई है। महापौर पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित है। इस पद के लिए कई उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं।
हालांकि, आरक्षण सीमा से अधिक संख्या में ओबीसी पार्षदों की मौजूदगी के कारण संकट बना हुआ है। भविष्य में उनकी सदस्यता रद्द होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए, भाजपा इस दुविधा में फंसी हुई है कि महापौर पद के लिए पहले ओबीसी पार्षद को मौका दिया जाए या महिला वर्ग को प्राथमिकता दी जाए। दूसरी ओर सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी सोमवार, 2 फरवरी को नामांकन की अंतिम तिथि से पहले अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप दे चुकी है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नागपुर स्थित आवास पर शुक्रवार को भाजपा की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में सीएम देवेंद्र फडणवीस व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बीच चर्चा हुई। इस बैठक में महापौर, उप महापौर, स्थायी समिति और अन्य विषय समितियों के सभापति के नामों पर चर्चा कर अंतिम रूप दिया गया है।
बैठक में ओबीसी और ओपन कैटेगरी के लिए सवा-सवा साल का कार्यकाल तय किया गया है। भाजपा ने पिछली सरकार के दौरान इस फॉर्मूले का इस्तेमाल किया था और विधायक संदीप जोशी और नगर भाजपा अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी को महापौर पद दिया था। वहीं, महापौर चुनाव के लिए नामांकन पत्र 2 फरवरी को स्वीकार किए जाएंगे। इसलिए, उसी दिन महापौर के नाम का खुलासा किया जाएगा।
इसी बीच, चयन समिति के नेताओं ने पार्षदों के घरों का दौरा किया और गुट पंजीकरण के लिए उनके हस्ताक्षर एकत्र किए। इस दौरान, सूत्रों ने बताया कि पार्षदों और वरिष्ठ नेताओं ने महापौर पद के उम्मीदवार पर भी चर्चा की। महापौर पद खुला वर्ग के पार्षदों के लिए आरक्षित है।
हालांकि, आरक्षण सीमा से अधिक होने के कारण ओबीसी पार्षदों की सदस्यता खतरे में पड़ने की संभावना को देखते हुए, सूत्रों ने बताया कि नेता इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि महापौर पद इस वर्ग को दिया जाए या खुले वर्ग को।











