लोकवाहिनी, संवाददाता:मुंबई। आजकल महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी दीपक कपूर सुर्खियों में बने हुए हैं। उनके ऊपर एक-दो नहीं, बल्कि कई गंभीर आरोप हैं। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने लगभग 4 अभियंताओं को 8 महीने से पदस्थापना (Posting) न देते हुए उनके वेतन पर होने वाले 8-10 करोड़ रुपये का महाराष्ट्र शासन को नुकसान करवाया। मुद्दा इतना बढ़ा है कि आने वाले विधानसभा सत्र में भी इसको लेकर सवाल उठाए जाएंगे।
दीपक कपूर पर अपने दफ्तर में सैकड़ों फाइलों को जमा करने के बाद भी निर्णय न लेने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। इस वजह से विकास कार्यों पर जो असर पड़ता है, उसकी वजह से करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पता चला है कि 105 करोड़ की निविदा (Tender) 16 महीने तक निर्देश के बिना उनके पास पड़ी रही। 16 माह बाद उसे रद्द कर दिया गया। यह निविदा अब 125 करोड़ तक की हो गई है। ऐसा करोड़ों का नुकसान महाराष्ट्र शासन को उनके निर्देश न देने के कारण हो रहा है। राजस्व मिलने वाले कई प्रकरण उनके द्वारा दबाए जाने की चर्चा मंत्रालय में हो रही है। ऐसी कितनी ही कहानियां सुनने मिलती हैं, लेकिन कपूर को इन सबसे कोई लेना-देना नहीं है। उनकी यह कार्यपद्धति ही जलसंपदा विभाग को करोड़ों का नुकसान पहुँचा रही है।
महाराष्ट्र की जनता के मन में कई सवाल आईएएस अधिकारी दीपक कपूर को लेकर उठ रहे हैं। इतनी शिकायतों के बाद भी इस आईएएस ऑफिसर के बारे में शासन-प्रशासन कोई कदम क्यों नहीं उठा रहा है? यह सवाल यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा हो गया है।
आईएएस अधिकारी को कौन सस्पेंड कर सकता है?
किसी भी आईएएस अधिकारी को सस्पेंड (निलंबित) करने का अधिकार उस सरकार को होता है, जिसके लिए वह काम करता है। हालांकि, केंद्र सरकार के मंत्रालय/विभाग खुद से आईएएस अधिकारी के खिलाफ निलंबन करने या विभागीय कार्यवाही शुरू करने में सक्षम नहीं हैं। संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय (जिसमें अधिकारी काम कर रहा है) को यह फैसला लेना होता है कि कार्यवाही शुरू की जाए या नहीं।
यह फैसला अधिकारी के शुरुआती स्पष्टीकरण (Preliminary Explanation) और अगर विजिलेंस का मामला हो, तो सीवीसी (CVC) की सलाह के आधार पर लिया जाता है। इसके बाद प्रस्ताव Department of Personnel & Training (DoPT) को भेजा जाता है, क्योंकि अंतिम रूप से विभागीय कार्यवाही शुरू करने का अधिकार केंद्र सरकार (DoPT के माध्यम से) के पास ही होता है।
मुकदमा चलाने की अनुमति कौन देता है?
आईएएस अधिकारी के खिलाफ आईपीसी (IPC) के अपराधों के लिए मुकदमा चलाने की अनुमति (Sanction for Prosecution) वह सरकार देती है, जिसके अधीनस्थ अधिकारी काम कर रहा है। यानी अगर राज्य सरकार के साथ काम कर रहा है तो राज्य सरकार, और केंद्र में है तो केंद्र सरकार। सुप्रीम कोर्ट के विनीत नारायण मामले के फैसले के अनुसार, यह अनुमति 3 महीने के अंदर दे दी जानी चाहिए।
शिकायत कहाँ भेजी जा सकती है?
अगर अधिकारी राज्य सरकार के साथ काम कर रहा है, तो शिकायत आमतौर पर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव (सामान्य प्रशासन विभाग) को भेजी जाती है। अगर अधिकारी केंद्र में काम कर रहा है, तो शिकायत सचिव/अतिरिक्त सचिव को भेजी जा सकती है।








