मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में मंगलवार को शब्दों के तीर खूब चले। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के युवा नेता आदित्य ठाकरे को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें “महाराष्ट्र का पप्पू बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।”
दरअसल, आदित्य ठाकरे ने वर्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में भारी गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए एक प्रेज़ेंटेशन दिया था, जिस पर फडणवीस ने यह तीखा तंज कसा।
फडणवीस का हमला — “विपक्ष को हार का डर”
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए फडणवीस ने कहा—
“मैं आदित्य को जानता हूँ, उनसे पप्पूगिरी की उम्मीद नहीं थी। उनका प्रेज़ेंटेशन वैसा ही था जैसा राहुल गांधी पहले कर चुके हैं। विपक्ष जानता है कि उनकी हार तय है, इसलिए लोकतंत्र का मजाक उड़ाया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि विपक्ष का यह सारा बवाल चुनाव से पहले “कवर फायरिंग” है क्योंकि जनता उनके साथ नहीं है।
आदित्य का पलटवार — “यह गलती नहीं, बड़ी धोखाधड़ी”
स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक हैं और इसी बीच आदित्य ठाकरे ने अपने समर्थकों के सामने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम, फोटो, पते और यहाँ तक कि जेंडर तक में जानबूझकर हेरफेर किया जा रहा है।
आदित्य का कहना था—
“यह कोई साधारण चूक नहीं… यह सुनियोजित धोखा है। असली लड़ाई तो तब शुरू होगी जब सूची का मसौदा हमारे हाथ में आएगा।”
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को बीएमसी चुनाव से पहले हर वार्ड की मतदाता सूची की गहन जांच के निर्देश दिए।
जनवरी 2026 तक होंगे निकाय चुनाव — राजनीतिक पारा चढ़ा
राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव जनवरी 2026 तक कराए जाने हैं। इससे पहले भी विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” के आरोप लगाए थे, जिन्हें सत्तारूढ़ दल ने सिरे से नकार दिया था।
ऐसे में मतदाता सूची का मुद्दा चुनावी गर्मी को और तेज कर चुका है।
दिवाली से पहले किसानों को बड़ी राहत — 19,000 करोड़ की किस्त तैयार
इसी बीच मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज की प्रगति पर जानकारी दी।
फडणवीस ने बताया—
- कुल 31,628 करोड़ रुपये का राहत पैकेज स्वीकृत
- अब तक 8,000 करोड़ सीधे 40 लाख किसानों के खातों में
- मंगलवार को और 11,000 करोड़ जारी करने की मंजूरी
- यह राशि 15 दिनों में किसानों तक पहुँचेगी
- अतिरिक्त 1,500 करोड़ भी अलग से जारी किए जाएंगे
मुख्यमंत्री ने किसानों से समय पर फसल खरीद पंजीयन कराने का आग्रह किया।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनावी सरगर्मी तेज
एक तरफ विपक्ष मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे हार के डर का नतीजा बता रहा है।
जैसे-जैसे बीएमसी और निकाय चुनाव नजदीक आएंगे, शिवसेना (UBT) और भाजपा के बीच यह राजनीतिक जंग और गरमाती दिखाई देगी।









