पुणे जिले के आलंदी में वारकरी परंपरा से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। यह वीडियो श्री ज्ञानेश्वर महाराज संस्थान समिती से जुड़े एक ट्रस्टी की कथित पाद्यपूजा से संबंधित बताया जा रहा है, जिस पर कई वारकरी भक्तों और संत साहित्य के अभ्यासकों ने आपत्ति जताई है।
वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि संस्थान समिति के ट्रस्टी योगी निरंजननाथ गुरु शांतीनाथ के चरणों में कुछ साधकों द्वारा जल अर्पित कर पाद्यपूजा की गई। इस दृश्य के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई भक्तों का कहना है कि वारकरी संप्रदाय में पूजन केवल संत ज्ञानेश्वर की पादुकाओं का ही किया जाता है और यही इस परंपरा की मूल पहचान है।
वारकरी परंपरा के कुछ जानकारों ने संत साहित्य का हवाला देते हुए इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने संत तुकाराम के अभंग की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा कि संत परंपरा में अभिमान और व्यक्तिपूजा के लिए कोई स्थान नहीं है। संत तुकाराम ने अपने अभंग में कहा है कि ऐसा पूजन नहीं करना चाहिए जिससे अभिमान बढ़े या लौकिक प्रसिद्धि का मोह पैदा हो।
भक्तों का कहना है कि वारकरी परंपरा की मूल भावना नम्रता, समता और भक्ति है। “एकमेका लागतील पायी रे” जैसी संत परंपरा की शिक्षाएं समाज में समानता और विनम्रता का संदेश देती हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति की पूजा होने से संत विचारों के विकृतिकरण का खतरा पैदा हो सकता है।
हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक संबंधित ट्रस्टी या संस्थान समिति की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन वायरल वीडियो के बाद आलंदी और वारकरी समाज में इस विषय को लेकर बहस तेज हो गई है।









