मुंबई। महाराष्ट्र में भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि वह किसी राजनीतिक ‘सहारे’ पर नहीं, बल्कि अपनी ताकत के दम पर आगे बढ़ना चाहती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि भाजपा को महाराष्ट्र में ‘बैसाखियों’ की जरूरत नहीं है और पार्टी अपने बूते सत्ता का संतुलन बनाए रखने में सक्षम है। चर्चगेट स्टेशन के पास भाजपा के नवनिर्माणाधीन राज्य कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि वंशवादी राजनीति का युग खत्म हो चुका है और अब केवल काम की राजनीति ही आगे ले जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि साधारण परिवार से आने वाला व्यक्ति अपने समर्पण और कठोर परिश्रम से देश का नेतृत्व कर रहा है, यह नई राजनीति की दिशा दिखाता है।
अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा की यात्रा चौथे पायदान से पहले स्थान तक पहुँची है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में शिवसेना की पुरानी नेतृत्व संरचना के चलते सम्मानजनक सीट बंटवारे की मांग ठुकराए जाने के बाद भाजपा ने अकेले चुनाव लड़कर राज्य में अपनी पहचान बनाई और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सबसे बड़ी पार्टी बनी। शाह ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य में ‘डबल इंजन’ की सरकार होने से विकास की रफ्तार बढ़ती है और इस साल के अंत में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा को विपक्ष को दूरबीन से भी न दिखने देने की तैयारी करनी चाहिए।
शाह के मुताबिक भाजपा का पार्टी कार्यालय केवल इमारत नहीं, बल्कि विचार और संगठन का मंदिर है। यहां से नीतियाँ, कार्यक्रम और जनसंपर्क रणनीतियाँ तय होती हैं। उन्होंने कहा कि जनसंघ के दिनों से विचारधारा और जनकल्याण भाजपा की पहचान रही है, और आज पार्टी एक वटवृक्ष इसलिए बनी क्योंकि लाखों कार्यकर्ताओं ने त्याग और प्रतिबद्धता से इसकी जड़ें मजबूत कीं। शाह ने स्वयं और मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा में पद मेहनत और प्रदर्शन से मिलता है, परिवार के नाम पर नहीं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने नए कार्यालय की 55,000 वर्ग फुट संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें पुस्तकालय, सभागार, बैठक कक्ष और बहु-स्तरीय पार्किंग जैसे आधुनिक ढांचे होंगे। उन्होंने हँसते हुए संकेत दिया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए कुछ कमरे रखने को कहा है ताकि सभी को याद रहे, पद का मूल स्रोत पार्टी है। शाह ने अनुच्छेद 370 हटाने, राम मंदिर निर्माण, सीएए, तीन तलाक समाप्ति और कुछ राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने को भाजपा की वैचारिक प्रतिबद्धताओं की पूर्ति बताते हुए कहा कि अब लक्ष्य 2047 तक ‘विकसित भारत’ है। सुरक्षा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सेना और सीमाओं के साथ खिलवाड़ की इजाज़त किसी को नहीं है और पहलगाम आतंकी हमले का जवाब भारत ने सख्त कार्रवाई से दिया।
इस बीच, शाह के बयान के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा कि दोस्त ‘बैसाखी’ नहीं होते। पत्रकारों ने जब उनसे सवाल पूछा तो फडणवीस ने कहा कि भाजपा, एकनाथ शिंदे और अजित पवार के नेतृत्व वाली पार्टियाँ मिलकर सरकार चला रही हैं और इसे बैसाखी कहना गलत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग शब्दों का अर्थ समझे बिना शोर मचा रहे हैं।
फडणवीस ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिक फायदा उठाना चाहता है। सतारा जिले में एक महिला चिकित्सक की आत्महत्या के मामले को उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति करने वाले बदकिस्मत हैं, सरकार दोषियों को नहीं बख्शेगी। आगे, उन्होंने मतदाता सूची पर संदेह जताने वाले बयानों को आगामी हार से पहले की ‘ढाल’ बताया। उनका कहना था कि दोहराए गए नामों पर सरकार ने भी चिंता जताई है, लेकिन विपक्ष कभी प्रमाण पेश करने में सफल नहीं रहा।
महाराष्ट्र की राजनीति में यह बयानबाज़ी संकेत देती है कि भाजपा एक तरफ गठबंधन को साथ रखते हुए भी अपने राजनीतिक आत्मविश्वास को सार्वजनिक रूप से और ऊँचा स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है—2025 के चुनावी मौसम में यह संदेश कार्यकर्ताओं और विरोधियों दोनों को पढ़ने की जरूरत है।











