लोकवाहिनी, संवाददाता:मुंबई। नासिक के ढोंगी बाबा अशोक खरात के कई काले कारनामे सामने आ रहे हैं और महिलाओं के यौन शोषण के साथ-साथ वित्तीय धोखाधड़ी के अपराध भी उजागर हो रहे हैं। इसी बीच, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने आज अशोक खरात मामले में सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
उन्होंने बताया कि मुझे अशोक खरात की कॉल डिटेल रिपोर्ट (CDR) की एक प्रति मिली है। मैंने इसकी जानकारी पुलिस महानिदेशक और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दे दी है। दमानिया ने दावा किया है कि इस भोंदू बाबा के तार सीधे राज्य के बड़े सत्ताधीशों से जुड़े हुए थे। उन्होंने बाकायदा सीडीआर का हवाला देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अशोक खरात के बीच कई बार बातचीत हुई है। चंडीगढ़ से एक वीडियो शेयर करते हुए दमानिया ने सवाल उठाया कि आखिर एक मुख्यमंत्री को ऐसे व्यक्ति से इतनी बार बात करने की क्या जरूरत थी?
एकनाथ शिंदे और खरात के बीच बातचीत
दमानिया के मुताबिक, एकनाथ शिंदे और खरात के बीच कुल 17 बार फोन पर चर्चा हुई। इनमें से 10 कॉल खुद मुख्यमंत्री की ओर से किए गए थे, जबकि 7 कॉल उधर से आए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक बार दोनों के बीच लगातार 21 मिनट तक लंबी बात हुई। अंजलि दमानिया ने मांग की है कि मुख्यमंत्री को राज्य की जनता को यह साफ करना चाहिए कि ये फोन कॉल किस सिलसिले में किए गए थे। इस खुलासे के बाद अब विपक्षी दल भी सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं।
रूपाली चाकणकर और अन्य नेताओं के नाम
सीडीआर रिपोर्ट में केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। दमानिया ने बताया कि रूपाली ने अशोक खरात को 177 बार फोन किया और दोनों के बीच करीब 33 हजार सेकंड से ज्यादा की लंबी गुफ्तगू हुई। इतना ही नहीं, रूपाली की बहन प्रतिभा किनकर ने भी खरात को 236 बार कॉल किए थे। इन आंकड़ों को देखकर ऐसा लगता है कि खरात का इस परिवार के साथ काफी करीबी और पुराना संपर्क था, जो अब जाँच का मुख्य विषय बन गया है।
अंजलि दमानिया की लिस्ट में कुछ और बड़े नाम भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल और एनसीपी के सुनील तटकरे ने भी अशोक खरात से 8-8 बार फोन पर बात की है। दमानिया का कहना है कि यह केवल सामान्य फोन कॉल्स का ब्यौरा है, जबकि व्हाट्सएप पर क्या बात हुई, उसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।
जाँच की मांग
उनका मानना है कि अगर व्हाट्सएप चैट और कॉल की भी जाँच हो, तो कई और बड़े राज खुल सकते हैं। इन खुलासों ने यह साफ कर दिया है कि खरात का गिरोह केवल अंधविश्वास तक सीमित नहीं था, बल्कि उसकी पहुँच सत्ता के गलियारों तक थी। फिलहाल यह पूरा मामला एसआईटी (SIT) के पास है, लेकिन दमानिया के इन दावों ने जाँच टीम पर भी दबाव बढ़ा दिया है। अंजलि दमानिया ने कहा कि उन्होंने यह जानकारी इसलिए सार्वजनिक की है ताकि आम जनता को पता चल सके कि उनके नेता किन लोगों के संपर्क में हैं।








