लोकवाहिनी, संवाददाताअमरावती। महान गायिका आशा भोंसले के निधन से जहाँ पूरा देश शोक में डूबा है, वहीं संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय से जुड़ी उनकी पुरानी यादें भी एक बार फिर ताजा हो गई हैं। लगभग 38 वर्ष पहले विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित किया था।
अमरावती विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मई 1983 को हुई थी। प्रारंभिक दौर में विश्वविद्यालय का कामकाज विदर्भ महाविद्यालय परिसर से संचालित होता था। उस समय कार्यकारी परिषद में प्रा. बी.टी. देशमुख, डॉ. देवीसिंह शेखावत और प्राचार्य डी.डी. देशमुख जैसे प्रमुख लोग शामिल थे।
डी.डी. देशमुख के फिल्म जगत और मंगेशकर परिवार से संबंध होने के कारण उन्होंने आशा भोंसले को डी.लिट. उपाधि देने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। यह सम्मान विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में तत्कालीन कुलपति डॉ. के.जी. देशमुख के हाथों प्रदान किया गया था।
सम्मान ग्रहण करने के लिए आशा भोंसले स्वयं अमरावती आई थीं। उस समय उन्होंने कहा था कि वऱ्हाड और अमरावती ने मंगेशकर परिवार को हमेशा सहयोग दिया है। उन्होंने अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर के कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा था कि यहाँ के लोगों का स्नेह उनके परिवार के लिए हमेशा विशेष रहा है। उन्होंने विनम्रता से यह भी कहा था कि अधिक पढ़ाई न करने के बावजूद विश्वविद्यालय ने उन्हें इतना बड़ा सम्मान दिया, इसके लिए वे हमेशा ऋणी रहेंगी।








